अब छोटे शहरों में भी किडनी ट्रांसप्लांट करा सकेंगे मरीज…..

अमरावती के निजी अस्पताल में किडनी ट्रान्सप्लांट का प्रयास सफल रहा। अस्पताल के डॉक्टरों ने मिलकर इस ऑर्गन ट्रांसप्लांट ऑपरेशन को मिलकर कामयाब किया।अकसर देखा गया है की मरीज़ों को ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए बड़े शहरों की तरफ जाना पड़ता है।
छोटे शहरों में तकनीकों के अभाव के चलते डॉक्टर इस तरह के ट्रांसप्लांट करने में सक्षम नहीं होते है। अमरावती के मल्टीस्पेशालिटी अस्पताल ने इस ट्रांसप्लांट को करके ये साबित कर दिया है की अब मरीज़ों को अपने शहर में रहकर इन सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।

 

इस किडनी ट्रांसप्लांट से जहां मरीज़ को नया जीवन मिला है। वहीं दूसरी तरफ लोगों को नई उम्मीद मिली है। बुलढाणा जिला के रहने वाले मरीज श्रीकांत टावरी को उनके पिता गोवर्धनदास टावरी ने किडनी देकर नया जीवन दिया। श्रीकांत टावरी पिछले 14 माह से किडनी की बीमारी से ग्रसित थे।

 

उनका इलाज खापर्डे बगीचा स्थित डॉ. अविनाश चौधरी के अस्पताल में चल रहा था। यहां उनका डायलिसिस किया जाता था। लेकिन श्रीकांत के स्वास्थ्य में सुधार होने की गुंजाइश नजर नहीं आ रही थी। श्रीकांत की हालत दिन ब दिन और बिगड़ती चली गई। डॉक्टरों ने श्रीकांत के परिवार को किडनी ट्रांसप्लांट कराने की सलाह दी। जिसके बाद श्रीकांत के पिता गोवर्धनदास टावरी ने श्रीकांत को अपनी किडनी देने का फैसला लिया।

श्रीकांत टावरी शहर के सुपर स्पेशालिटी अस्पताल में 2 अप्रैल को भर्ती हुए। दोनों ही पिता और बेटे की 18 प्रकार की जांच हुई। जिसके पहले डॉ. अविनाश चौधरी और सिव्हील सर्जन श्यामसुंदर निकम ने किडनी ट्रांसप्लांट के पूर्व स्टेट एथोरॉईज कमेटी की अनुमति ली। अनुमति मिलते ही बुधवार 4 अप्रैल को सुबह 10 बजे प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरु हुई। प्रत्यारोपण की यह प्रक्रिया साड़े तीन घंटे तक जारी रही। जिसमें नागपुर और अमरावती के विशेषज्ञों की टीम खासतौर से मौजूद थी। दोपहर 3 बजे के आस पास ट्रांसप्लांट प्रक्रिया पुरी तरह से सफल हुई।

 

डाक्टरों ने बताया कि श्रीकांत बचपन से पोलियोग्रस्त था। किडनी की तकलीफ का आभास होने के बाद भी उसने हिम्मत नहीं हारी और समय पर उपचार करवाता रहा। इस दौरान उसको कई प्रकार की बीमारियां भी जकड़ चुकी थी। समय पर उपचार करने के चलते उसे किसी बात की तकलीफ नहीं हुई। किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान श्रीकांत की माता शोभा टावरी और श्रीकांत के भाई ताराचंद और बहन प्रिया टावरी भी मौजूद थे।

 

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