बैट से पीटकरकी पति की हत्या,मगर एक दिन के लिए भी जेल नहीं जाना पड़ा….

करीब 5 साल पहले उषा रानी नाम की इस महिला ने अपने बेटे के क्रिकेट बैट से पीट-पीटकर अपने पति की जान ले ली थी। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि उषा को एक दिन के लिए भी जेल नहीं जाना पड़ा। उषा 49 साल की हो चुकी हैं और मदुरै में इन्वेस्टमेंट कंसल्टेंट के रूप में काम करती हैं। इन्होंने अपने पति की हत्या जरूर की थी, लेकिन पुलिस और कानून की नजर में उषा दोषी नहीं थी। दरअसल, जिन परिस्थितयों में उषा ने ये हत्या की, उसे कानून की नजर में हत्या माना ही नहीं गया।

 

क्या था मामला: उषा की शादी ज्योति बसु नाम के एक शख्स से हुई थी। शादी के बाद से ही ज्योति उन्हें और उनके परिवार को बहुत प्रताड़ित करता था। यहां तक कि ज्योति की वजह से उनका परिवार कर्जदार हो गया और आर्थिक स्थिति बिल्कुल खराब हो गई। जब उषा ने चीज़ें ठीक करने की कोशिश की तो उसकी छोटी बहन की ज़बरदस्ती शादी करवाने की कोशिश की गई। बच्चों की पढ़ाई को लेकर भी उषा को अपने ही परिवार से झगड़ा मोल लेना पड़ा। उषा और ज्योति बासु की बेटी जब 14 की हुई तो उसकी भी जबरदस्ती शादी की कोशिश की गई। उषा को बच्चों के साथ ज्योति रोज पीटता था।

इस बीच उषा को ये भी पता चल गया कि ज्योति के गैर महिलाओं के साथ संबंध हैं, लेकिन परिवार ने कभी उसका साथ नहीं दिया। आखिरकार तंग आकर उसने बच्चों के साथ पति का घर छोड़ दिया। वह अपना अलग काम करने लगी। कई बार ज्योति शराब पीकर आया और वहां हुड़दंग मचाने की कोशिश की। 9 फरवरी 2012 की रात भी कुछ ऐसा ही हुआ। शराब के नशे में ज्योति उषा के घर पहुंचा और जबरदस्ती करने की कोशिश करने लगा। उषा ने हार नहीं मानी और ज्योति से किसी तरह छूट गई। जब पत्नी पर बस न चला तो ज्योति ने अपनी ही बेटी को दबोच लिया। बच्ची खुद को पिता की पकड़ से छुड़ा नहीं पा रही थी।

उषा को कुछ महीने पहले ही ये भी पता चला था कि ज्योति बासु को एड्स है। उषा से अपने पति का ये व्यवहार देखा नहीं गया। उषा ने बगल में पड़े बेटे का क्रिकेट बैट उठाया और ज्योति बासु को बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया। उषा ने उसे तब तक पीटा जब तक उसकी मौत नहीं हो गई। पति की ह्त्या के बाद उषा सीधे पुलिस स्टेशन गई और वहां सब कुछ सच सच बता दिया।

केस के जांच अधिकारी ने उषा पर आईपीसी की धारा 100 लगाई और कोई मुकदमा नहीं चलाया। यह पहली बार था जब तमिलनाडु में धारा 100 इस्तेमाल किया गया। उषा के बच्चों के बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज करवाए गए और उषा को बाइज़्ज़त घर भेज दिया गया। उसके बाद उषा कभी पुलिस थाने  या कोर्ट नहीं गई ना ही पीछे मुड़कर देखा।

क्या है धारा 100?: सेल्फ डिफेंस में कोई भी शख्स अगर अपराधी को पीटता है या फिर पीटने के कारण अपराधी की मौत हो जाए तो आईपीसी की धारा 100 के तहत बचाव हो सकता है। कानूनी जानकार बताते हैं कि सेल्फ डिफेंस का मतलब है कि कोई भी शख्स अपने शरीर या फिर अपनी प्रॉपर्टी को बचाने के लिए लड़ सकता है लेकिन कोई भी शख्स अपने बचाव में किसी और को उतना ही नुकसान पहुंचा सकता है जितना उसके बचाव के लिए जरूरी था।

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