रानी की खूबसूरती ने राजा को बनाया तपस्वी…..

उज्जैन एक पावन नगरी होने के साथ ही पुरे विश्व में एकलौती ऐसी जगह है जहां पर प्राचीन युग की कई पौराणिक कथाओ का आगाज़ हुआ है | इन कथाओ से जुड़े तथ्य आज भी मौजूद है जिनको कोई भी देख सकता है |इन्ही में से एक प्रसिद्ध कहानी है एक ऐसी रानी की जिसने अपने स्वार्थ में एक राजा को ऐसा धोखा दिया कि उस राजा ने सारे जग को भूलकर सन्यास ही ले लिया |यह कहानी लगभग 2500 वर्ष पुरानी विश्वप्रसिद्ध राजा भृतहरि की गुफा की है |

म.प्र. के उज्जैन शहर में स्थित भृतहरि राजा की गुफा के बारे में तो आपने सुना ही होगा पर क्या आप उसके पीछे का राज़ जानना चाहेंगे |कहा जाता है की राजा भृतहरि की 2 रानी होते हुए भी उन्होंने अपनी पसंद से तीसरी शादी रानी पिंगला से की | कहा जाता है की रानी पिंगला के मोह में राजा भृतहरि कुछ इस तरह मग्न थे कि उन्होंने उसके सामने सारे संसार को भुला दिया था |जबकि रानी पिंगला राजा से नहीं बल्कि एक घुड़साल से प्रेम करती थी और वह राजा के प्रेम को आपने फायदे के लिए गलत तरह से इस्तेमाल करती थी |

हद तो तब हो गयी जब राजा भृतहरि ने प्रेम में मोहित होकर एक सिद्ध तपस्वी के द्वारा दिए गये सदैव के लिए अमर रहने के वरदान का फल रानी पिंगला को दे दिया ताकि रानी हमेशा इसी तरह से सुन्दर और मनमोहक वर्ण में रहे और  रानी ने वह फल उस घुड़साल को दे दिया ताकि वो हमेशा जवान रहे और घुड़साल ने वह फल एक वैश्या को दे दिया | परन्तु वैश्या ने यह सोचकर उस फल को नहीं ग्रहण किया कि अगर वह अमर हो गयी तो उसे सदैव के लिए ऐसा कुकर्म करना पड़ेगा | वह उस फल को राजा भृतहरि को देने के लिए दरबार में गयी और उसने राजा को वह फल यह देते हुए दिया कि यदि आप इसको खाएंगे तो आप सदैव इसी तरह से प्रजा की रक्षा और भलाई का कार्य करते रहेंगे |

तब राजा भृतहरि के सामने रानी पिंगला का सारा सच सामने आया जिसके पश्चाताप के स्वरुप उन्होंने राज्य और संसार को त्याग कर एक गुफा में जाकर तपस्या की | मान्यता है कि 2500 वर्ष पहले गुरु गोरखनाथ व बाद में राजा भृर्तहरि ने 12 वर्ष गुफा में तपस्या की। पुराने समय में गुफा से चारधाम जाने के रास्ते निकलते थे |

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