क्या सही है आज का भारत बंद? रिपोर्

एससी एसटी एक्ट में संशोधन के बाद अब सामान्य वर्ग के लोगों में रोष है। मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में सामान्य वर्ग के लोग सड़कों पर उतर रहे हैं। एक्ट में संशोधन को सामान्य वर्ग पर अत्याचार माना जा रहा है। इसलिए 6 सितम्बर को भारत बंद का आह्वान किया गया है।
सोशल मीडिया पर भारत बंद को लेकर अनेक पोस्ट डाली जा रही है। लेकिन सवाल उठता है क्या यह भारत बंद 2 अप्रैल को किए गए एसससी एसटी वर्ग के बंद की तरह होगा? दो अप्रैल को बंद करवाने के लिए देशभर में कांग्रेस के एससी एसटी वर्ग के नेता सड़कों पर थे। चूंकि बंद दहशत से होता है, इसलिए बाजारों में लहराती तलवारे और मोटे मोटे डंडों को देखते हुए किसी भी व्यापारी ने दुकान खोलने की हिम्मत नहीं की। लेकिन इसके बाद भी वाहनों को आग लगाई गई और तोड़फोड़ की।
ऐसा लगा कि जैसे पूरे देश में हालात बिगड़ जाएंगे। बंद का दबाव ही रहा कि केन्द्र सरकार ने संसद में प्रस्ताव लाकर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पलट दिया, जिसमें सामान्य वर्ग के व्यक्ति की गिरफ्तारी से पहले जांच के निर्देश दिए गए थे। सवाल यह भी है कि क्या 6 सितम्बर के सामान्य वर्ग के बंद को सफल करवाने के लिए कांग्रेस अथवा भाजपा का कोई नेता डंडे लेकर सड़क पर उतरेगा? देश के जो हालात है उसमें वर्गवाद की राजनीति ने हालातों को और बिगड़ा है। चूंकि नवम्बर में चार राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं, इसलिए इन्हीं राज्यों में यह मुद्दा ज्यादा गरम हो रहा है। सामान्य वर्ग के अनेक लोगों की नाराजगी मौजूदा सरकार से भी है। जबकि संसद में जो प्रस्ताव पास हुआ उस पर सभी राजनीतिक दलों की सहमति थी। यही वजह है कि अब 6 सितम्बर के भारत बंद के समर्थन में राजनीतिक दलों के नेता सामने नहीं आए हैं। देखना होगा कि 6 सितम्बर का भारत बंद कितना सफल होता है।
कलराज मिश्र का बयान
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री कलराज मिश्र ने कहा है कि एससी एसटी एक्ट में संशोधन होने से सामान्य वर्ग के लोगों में नाराजगी है। सरकार को इस नाराजगी का ख्याल रखना चाहिए। यह न्याय का सामान्य सिद्धांत है कि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी से पहले आरोपों की जांच हो। एससी एसटी एक्ट में दर्ज मुकदमे अदालत में झूठे साबित हो जाते हैं। ऐसे में आरोपी को बिना वजह जेल तक जाना पड़ता है। मिश्र ने कहा कि एससी एसटी वर्ग के लोगों के हितों की रक्षा होनी ही चाहिए। लेकिन इस एक्ट के नाम पर अत्याचार नहीं किया जा सकता।
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