साहेब! मैं एक वैश्या हूं और मैं अभी तक कुंवारी हूं…

कोई भी इंसान शौक के लिए चोरी नहीं करता, ठीक इसी तरह कोई भी लड़की वेश्या शौक के लिए नहीं बनती, उससे उसकी मजबूरी ये सब करवाती है। साहेब गरीबी और भूख का ठप्पड़ जब पड़ता है तो सही-गलत की पहचान करना मुश्किल हो जाता है।

लोग वेश्याओं को बहुत ही गंदी नजरों से देखते हैं.. ऐसी लड़कियों को देखते ही लोगों के मुंह से या तो लार टपकती है या फिर मुंह फूल जाता है। लेकिन मेरा ये मानना है कि ऐसी मजबूर लड़कियों और महिलाओं को वेश्या कहना सरासर गलत है। ऊंची-ऊंची हांकने वाले या ऐसे महिलाओं को गाली देने वाले ये भूल जाते हैं कि कभी न कभी वो भी इनके पास गए थे।

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मुझे कहने में बहुत परेशानी हो रही है कि  नेता, अभिनेता और धर्माचार्य भी इस धंधे को चला रहे हैं। सेक्स हर स्वस्थ शरीर की भूख है फिर चाहे वो मर्द हो या औरत। दोनों को एक दूसरे की जरूरत होती है। कहते हैं कि विवाहित जीवन में सेक्स का बहुत बड़ा महत्त्व होता है कि इसी चट्टान के मारे कितने सारे घर बनते हैं और बने हुए घर टूट भी जाते है। मज़बूरी में बनी एक वैश्या जो रात को ग्राहक का इंतजार कर रही हो, उसका दर्द और परेशानियां आप कैसे समझ सकते हैं।

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अंधेरी रात में मखमली बिस्तर में सोने के बजाय इन लोगों ने यह रास्ता क्यों चुना ? वे मजबूरी में या स्वेच्छा से पैसों की खातिर अपना शरीर बेचती हैं, हम सब भी मजबूरी में या स्वेच्छा से पैसों के लिए अपना समय, अपना हुनर, अपनी सेवाएं, यहां तक कि अपना ईमान बेचते हैं। दोनों में कोई फर्क नहीं है सिवाय इसके कि वेश्याओं को यह सभ्य समाज नीची नज़रों से देखता है।

एक बार अगर कोई औरत इस दलदल में फंस गई तो इसका यहां से बाहर निकल पाना मुश्किल होता है। यहां हर महिला की अलग ही कहानी होती है। इन वेश्‍याघरों के अंदर का नजारा देखकर शायद आपकी आंखें भर आए। यहां काम करने वाली कुछ वेश्याएं अपने बच्‍चों को भी अपने साथ यहीं पर रखतीं हैं। इन महिलाओं के अपने ही मासूमों के सामने खुलेआम अपने जिस्‍म का सौदा करना कितना कठिन होता होगा। ऐसा सोचकर भी रुह कांप जाती है। भला आप सोचिए उनपर क्या बीतती होगी।

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सीमा एकटक खुले आसमान को निहारे जा रही थी। यहां सीमा एक एक ऐसी औरत है जिसने अपने महबूब को टूट कर प्रेम किया है। सीमा के पिता नहीं थे लेकिन, सीमा की मां ने सीमा को शुरू से ही हॉस्टल में रखकर पढाया था। सीमा छुट्टियों में घर नही आती थी, बल्कि हर साल की छुट्टी में उसको लेकर वो किसी पहाड़ी इलाके में घूमने चली जाती थी, ताकि सीमा अपनी मां के काम बारे में कुछ जान ना पाए।

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सीमा की पढ़ाई पूरी होने के बाद सीमा को सत्तर हजार रूपये महीने की सैलरी वाली अच्छी  नौकरी भी मिल गई थी सीमा जिद करने लगी, कि माँ इस बार घर चलेंगे। फिर सीमा अपनी माँ के साथ घर चल पड़ी।  स्टेशन से घर 5 किलोमीटर की दूरी पर था दोनों ने ऑटो किया।  ऑटो ड्राइवर ने रूपये लेते वत कहा कि क्यों चमेली क्या बेटी को भी वही करवाओगी जो तुम कर रही हो।

चमेली बोली- फ़ालतू की बकवास मत करो अपने काम से काम रखो ।  रूपये देने के बाद चमेली ने सोचा बेटी आई है थोडा सामन ले लूं। इसलिए वो दुकान पर गई, सामान देते समय दुकानदार बोला ! चेमली बिटिया को यहां क्यूँ लाई हो, इसे तो अपने धंधे से दूर ही रखना।  इस एरिये में भेडिये आते हैं कहां तक छुपा के रख पाओगी।

 

चमेली नजरे नीची किये चुपचाप चली जा रही थी और सीमा एकदम झील की तरह शांत। सीमा ने देख सुनकर भी अनदेखा कर दिया था, जैसे कुछ हुआ ही ना हो । घर आकर वो माँ “चमेली” से बोली- माँ मैंने जो सुना है क्या वो सही है ? चमेली ने सीमा को गली लगाया और रो-रोकर बोली ! हाँ मैं एक वेश्या हूँ। बेटी मेरा भी घर था तेरे पापा तेरी दादी दादा के साथ हरिद्वार गंगा मैया के दर्शन को गए थे एक रोड एक्सीडेंट में सबकी मृत्यु हो गई थी, तब तू मेरे पेट में । महीने की थी, इसलिए तेरे पापा मुझे नहीं ले गए थे। काश मैं भी चली जाती उनके साथ, तो आज इतने दुःख ना झेले होते ।

तेरे चाचा ने घर से बेघर कर दिया, कहाँ जाती कोई ठिकाना ना था । इसलिए ये सब करना पड़ा। बेटी ने माँ के गले से लग गई और बोली ! माँ तुम तो महान हो, तुमने मेरे कैरियर वो उडान दी है, जिसकी उम्मीद उन हालातों में कभी कोई कर नहीं सकता, तुमने मेरे लिए कितने दुःख झेले हैं, मुझे इस दलदल से दूर रखा, मेरी जिन्दगी बना दी और खुद इस आग में जलतीं रही। अब आपकी बेटी सक्षम हो गई है अपनी माँ का ख्याल रखने के लिए।

सीमा विजय नाम के लड़के से प्यार करती थी। दोनों की शादी की बात चलने लगी। विजये के पिता इस रिश्ते के लिए राजी भी हो गए लेकिन चमेली को देखते ही विजय के पिता को होश उड़ गए। विजय के पिता चमेली से बोले ! तुम चमली हो ? चमेली कुछ कह ना सकी, धीरे से सर हिला दिया और अपने आंसुओं का गला घोंट लिया।  विजय के पिता बोले “तुम तो एक वैश्या हो, मेरे बेटे से तुम्हारी बेटी की शादी नहीं हो सकती ”

 

चमेली की सहन शक्ति समाप्त हो चुकी थी वो बिफर कर बोली, सुनो सेठ ! “वैश्या शब्द तो फिर भी अच्छा है तुम अपने घिनौने मुंह से इस नाम को अपवित्र ना करो। वैश्या शब्द इस समाज के लिए और तुम्हारे लिए एक गाली अवश्य होगा, लेकिन ये हमारे लिए समय की एक कैद थी, एक अवस्था थी।

थोड़ी देर में सब चले गए । मां बेटी दोनों ने शांति से चाय पी और अपने अपने काम में लग गई लेकिन, सीमा की नजरे मोबाइल पर ही टिकी थीं । वो सोच रही थी, कि अभी तक विजय का फोन क्यों नही आया ।  एकाएक मोबाइल की आवाज़ ने दिल धड़का दिया सीमा ने झपटकर फोन उठाया और बोली… विजय तुमने इतनी देर क्यों लगा दी फोन करने में ? मोबाइल के स्पीकर से आवाज़ आ रही थी सीमु तुम मेरे लायक नही हो, तुम्हारा खानदानी पेशा मुझे पता चल गया है, मुझे तुम भूल जाओ…. मैं तुमसे शादी नही कर सकता ।  मैं भी तुम्हे भूलने की कोशिश करूंगा।

 

सीमा धीरे धीरे बुदबुदा रही थी अगर तुम कहते हो तो, “हाँ मैं एक वैश्या हूँ, “हाँ मेरी मां वैश्या थी, हाँ मैं वैश्या की बेटी हूँ, लेकिन मैं एक देवी की तरह पवित्र हूं, विश्वास कीजिए मैं अभी तक कुंवारी हूँ। रुक्मणी दौड़ कर आई अपनी बेटी की हालत देखकर वो बेहोश हो गई।  अब आप लोग ये कहानी पढ़कर ये बताएं कि वैश्या गलत है या फिर एक औरत को वेश्या कहने वाले हम लोग।

 

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