55 साल के दादा ने तेंदुए से बचाया अपने पोते को,करीब 25 मिनट चला ये संघर्ष ….

कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग के अंतर्गत कतर्नियाघाट रेंज के चहलवा ग्राम के मजरा सिरसियनपुरवा निवास कुंजीलाल (55) छुट्टा जानवरों से फसल को बचाने के लिए खेत में सोए थे। उनके साथ उनका पांच वर्षीय पोता कमलनयन भी जिद करके दादा के साथ खेत में सोया था। शनिवार रात करीब 12 बजे के आसपास जंगल से निकलकर खेत में तेंदुआ आ गया। तेंदुए ने घात लगाकर कमलनयन पर हमला किया और उसे अपने जबड़ों में दबोच लिया। कमलनयन चीखने लगा, जिस पर उसके दादा कुंजीलाल की नींद खुल गई। पोते को तेंदुए के जबड़े में देख उनके होश उड़ गए।

बच्चे की चीख सुनकर साथ में सोए वृद्ध की नींद खुली, तो मंजर देख उनके होश उड़ गए। 55 साल के कुंजीलाल ने हिम्मत दिखाई और तेंदुए से भिड़ गए। करीब 25 मिनट चले इस संघर्ष में कुंजीलाल ने तेंदुए के जबड़ों में फंसे अपने पोते को मौत के मुंह से बचा लिया।

 

बताया गया कि तेंदुए के हमले में दादा-पोते गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं। ग्रामीणों के दौड़ने पर तेंदुआ जंगल की तरफ भाग गया। वन विभाग की टीम ने घायलों को सुजौली पीएचसी में भर्ती कराया। जहां से दोनों को मिहींपुरवा सीएचसी रेफर किया गया है। उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। इस बीच घटना के बाद से इलाके में दहशत फैल गई है।

 

 

तेंदुआ दबे पांव कमलनयन को खींचकर जंगल की तरफ जाने लगा लेकिन कुंजीलाल ने साहस दिखाते हुए लाठी से तेंदुए पर हमला करना शुरू कर दिया। इस पर तेंदुए ने कुंजीलाल पर हमला कर दिया और अपनी जान की परवाह न करते हुए पोते को बचा लिया। शोर सुनकर पहुंचे ग्रामीणों ने मशाल जलाकर हांका लगाया। इस पर तेंदुआ कमलनयन और उसके दादा कुंजीलाल को छोड़कर जंगल की तरफ भाग गया। ग्रामीणों के मुताबिक कुंजीलाल करीब 25 मिनट तक तेंदुए से लड़ते रहे। इलाके में उनकी बहादुरी की चर्चा है। हालांकि, दोनों वन्यजीव के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

 

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी दबीर हसन ने बताया कि कुंजीलाल और तेंदुए के बीच काफी देर तक संघर्ष हुआ है। लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। कतर्नियाघाट अभ्यारण्य के प्रभागीय वनाधिकारी जीपी सिंह ने कहा कि ग्रामीण और उसके पोते पर तेंदुए ने हमला किया है। घायलों का इलाज चल रहा है और जल्द ही मुआवजा दिलाया जाएगा। ग्रामीणों को रात के अंधेरे में घरों से बाहर निकलने के लिए मना किया गया है। यदि बहुत आवश्यक हो तो समूह में निकलना चाहिए।

 

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