सरकार ने बढ़ाये डाई की कीमत किसानो को लगा झटका

सरकार से राहत की उम्मीद लगाए रबी सीजन की तैयारियों में जुटे जनपद के किसानों को डीएपी के लिए 7.45 करोड़ रुपये और एनपीके (12.32.16) के लिए 3.80 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार उठाना पड़ेगा। बीते दिसंबर माह में जहां डीएपी 1076 रुपये प्रति बोरी बिक रही थी, वही उसकी कीमत बढ़ कर 1400 रुपये प्रति बोरी हो गई है। इसी तरह एनपीके बीते दिसंबर में 950 रुपये प्रति बोरी से बढ़ कर 1350 रुपये प्रति बोरी हो चुकी है।

जिला कृषि अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले रबी सीजन में 11500 एमटी डीएपी की खपत हुई थी। तब डीएपी की कीमत 1074 रुपये थी, अब डीएपी की कीमत में 326 रुपये प्रति बोरी की बढ़ोत्तरी हो गई है। इस बढ़ कीमत के कारण जनपद के किसानो पर अकेले डीएपी की खरीद पर 7.45 करोड़ रुपये का भार बढ़ गया है। इसी तरह एनपीके की कीमत में देखे तो 400 रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है। पिछले वर्ष 5000 मीट्रिक टन एनपीके का जनपद के किसानों ने इस्तेमाल किया था। इस तरह तकरीबन 3 करोड़ रुपये का भार सिर्फ एनपीके की खरीद में ही किसानों पर पड़ेगा।

इस तरह बढ़ी डाई और एनपीके की कीमत

माह-डाई की कीमत-एनपीके की कीमत

दिसंबर 2017- 1076-950

जनवरी-1200-1140

मई-1250-1175

अगस्त-1340-1290

सितंबर-1400-1350

पुरानी दर का माल भी बढ़ी कीमत पर

जिले में सहकारिता क्षेत्र के 350 और निजी क्षेत्र के 800 खाद विक्रेता हैं। खाद विक्रेताओं की दुकानों पर पुरानी कीमत की खाद पड़ी हुई है जिसे किसानों को नई दरों पर उपलब्ध कराया जा रहा है। लेकिन खाद विक्रेताओं की इस लूट पर नियंत्रण लगाने में विभाग कोई रुचि नहीं दिखा रहा है। हालांकि खाद की कालाबाजारी रोकने और किसानों को अनुदानित खाद वाजिब कीमत पर पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार ने गोरखपुर जनपद में एक अगस्त 2017 से ईपीओएस मशीन से खाद की बिक्री करने का नियम बना रखा है। जिला कृषि अधिकारी अरविंद कुमार चौधरी कहते हैं कि किसानों को बोरी पर छपी कीमत देख कर ही भुगतान करना चाहिए। किसी खाद्य विक्रेता के खिलाफ शिकायत मिली तो सख्त कार्रवाई होगी।

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