यूपी उपचुनाव: दो सीटों के लिए कल होगा मतदान, भाजपा के लिए आन-बान की लड़ाई

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के विधानसभा चुनाव जीतने और राज्य सरकार का हिस्सा बनने के बाद उत्तर प्रदेश की दो मुख्य लोकसभा की सीटें पिछले साल ही खाली हो गईं थीं। पर इसके बाद कई दिनों तक चुनाव हो नहीं पाया। अब कल यानि कि 11 मार्च को इन दोनों सीटों गोरखपुर और फूलपूर पर लोकसभा के उपचुनाव होने हैं।

इस चुनाव ने तभी एक नया मोड़ ले लिया था जब यूपी की दो सबसे बड़ी पार्टियों ने साथ मिलकर इस चुनाव को लड़ने का ऐसान कर दिया था। मायावती की पार्टी बहुजन समाजवादी पार्टी ने इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों को समर्थन देने की घोषणा कर दी थी। कांग्रेस ने भी अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं, पर लडाई तो अब भाजपा से सपा-बसपा का देखने लायक होगा।

ये उपचुनाव कई मायने में महत्वपूर्ण है। इसकी महत्वपूर्णता ना सिर्फ सपा-बसपा के साथ आ जाने से देखी जा सकती है, बल्कि भाजपा की कड़ी मशक्कत को देख कर भी समझी जा सकती है। यूपी में विधानसभा चुनाव में एकतरफा जीत हासिल करने वाली भाजपा और उसके बाद मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ के पास ये पहली चुनौती आई है, जिसे उन्हें पास करना ही होगा। दो में से एक भी सीट अगर वो हार गए तो फिर इसका असर अगले साल के लोकसभा चुनाव में भी देखने को मिल सकता है।

इसके साथ इस उपचुनाव में जनता का भी मूड भांपा जा सकता है। जनता भी इस उपचुनाव के बाद ये बता पाएगी कि क्या वो योगी के कामों से खुश हैं या नहीं। फूलपुर से सपा के नागेंद्र सिंह पटेल, भाजपा के कौशलेंद्र सिंह पटेल और कांग्रेस के मनीष मिश्रा उम्मीदवार हैं। जबकि गोरखपुर से सपा के प्रवीण निसाद, भाजपा के उपेंद्र दत्त शुक्ला और कांग्रेस की डॉ सुनीता उपचुनाव के लिए मैदान में हैं।

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