लकी और धनी रत्नों से बनें …..

कुंडली के अनुसार रत्न धारण करना सदा लाभप्रद होता है। रत्न धारण करते समय लग्न कुंडली, ग्रहदशा, अन्तर्दशा का भी ध्यान रखना चाहिए। साधारणत: लग्न कुंडली में शुभ भावों के ग्रहों की स्थिति के अनुसार ही रत्न धारण करें। रत्नों के प्रभाव को लेकर प्राचीन समय से ही बहुत मान्यताएं प्रचलित हैं। ज्योतिष शास्त्र में जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में शुभफल प्राप्त करने के लिए रत्नों को धारण करने के बारे में बताया गया है। कुछ रत्न आजीवन पहने जा सकते हैं जबकि कुछ रत्न दशा, अन्तर्दशा या गोचरीय अवस्था में पहनने चाहिएं। कुंडली में शुभ भाव लग्न, पंचम ,नवम, दशम को माना गया है। भावम भाव सिद्धांत के अनुसार लग्न से पंचम, पंचम भाव, पंचम से पंचम नवम भाव और नवम से नवम पंचम भाव होता है अर्थात पंचम शुभ है तो नवम अतिशुभ हुआ। लग्न स्वयं, पंचम भाव विद्या, संतान व बुद्वि नवम भाव धर्म व भाग्य का होता है।

इस प्रकार किसी मनुष्य के तीनों भावों के स्वामियों को ध्यान में रख कर रत्न धारण करना शुभप्रद होगा। कुंडली में कारक ग्रह को भी ध्यान में रखकर रत्न धारण करना चाहिए। क्योंकि कारक ग्रह ज्यादातर शुभता ही प्रदान करता है। अपने लिए शुभ रत्न धारण करते समय लग्न की स्थिति का ध्यान रखना चाहिए। यदि भाग्येश निर्बल हो व अन्य शुभ ग्रहों से कोई संबंध न हो तो भाग्येश रत्न धारण करने से सफलता नहीं मिलती है। ऐसी अवस्था में लग्नेश या पंचमेश का रत्न धारण करने से या योग कारक ग्रह का रत्न धारण करने से सफलता प्राप्त होती है। शत्रु ग्रहों के रत्न एक साथ धारण नहीं करने चाहिएं।

मेष लग्न : मेष लग्न के लिए सूर्य पंचम भाव का स्वामी होता है। इस कारण विद्या व संतान सुख के लिए सूर्य रत्न माणिक धारण करना शुभ होगा। मेष लग्न में गुरु भाग्य व द्वादश भाव का स्वामी होता है अत: गुरु द्वादशेष होते हुए अपनी राशि का फल देता है। इसलिए गुरु मेष लग्न के लिए शुभ होता है अत: गुरु रत्न धारण करने से भाग्य संबंधी मान व उच्च स्तरीय सफलता प्राप्त होगी। मंगल मेष लग्न के लिए लग्न व अष्टम भाव का स्वामी होता है। लग्नेश यदि किसी अशुभ भाव का स्वामी तो भी शुभ होता है।

वृषभ लग्न : वृषभ लग्न के अनुसार सूर्य चतुर्थ भाव का स्वामी होता है अत: सूर्य की स्थिति निर्बल हो तो पारिवारिक, सामाजिक और सम्पति संबंधी विवाद हो तो सूर्य रत्न माणिक धारण करना चाहिए। आर्थिक सफलताओं, शिक्षा, संतान आदि के लिए बुध रत्न पन्ना धारण करना लाभप्रद रहेगा।  वृषभ लग्न के लिए शनि भाग्य एवं कर्मक्षेत्र का स्वामी होकर योगकारक हो जाता है अत: वृषभ लग्न वाले जातकों को शनि रत्न नीलम या उपरत्न धारण करना चाहिए। वृषभ लग्न में प्रभावशाली व्यक्तित्व बनाने के लिए शुुक्र रत्न धारण करना लाभकारी रहेगा। वृषभ राशि का स्वामी शुुक्र है तथा चन्द्रमा उच्च का माना जाता है।

मिथुन लग्न : मिथुन लग्न के लिए बुध लग्न व चतुर्थ भावों का स्वामी होकर शुभ ग्रह होगा अत: बुध रत्न पन्ना अवश्य धारण करना चाहिए। मिथुन लग्न के जातकों की यदि आर्थिक या पारिवारिक स्थिति चिंताजनक हो तो चन्द्र रत्न मोती धारण कर संबंधित परिस्थितियों को अनुकूल बनाया जा सकता है। मिथुन लग्न में शुक्र 5वें व 12वें भावों का स्वामी होगा। इस कारण शुक्र पंचम भाव का स्वामी होकर शुभ माना जाता है अत: संतान, शिक्षा, प्रेम प्रसंगों में सफलता के लिए शुक्र रत्न हीरा या उपरत्न धारण करना चाहिए।

कर्क लग्न :  कर्क लग्न के जातकों की कुंडली में मंगल शुभ होता है  क्योंकि मंगल पंचम व दशम भाव का स्वामी होकर कारक ग्रह होता है अत: कर्क लग्न वालों के लिए मंगल रत्न मूंगा धारण करना शुभ होता है। भाग्य संबंधी अड़चनों के लिए पुखराज धारण करना चाहिए, कुंडली में यदि चन्द्रमा निर्बल हो तो चन्द्र रत्न मोती धारण करें अन्यथा ठोस चांदी धारण करने से लाभ होगा।

सिंह लग्न : सिंह लग्न में सूर्य लग्नेश होकर जीवन में आत्मविश्वास आरोग्यता, उन्नति प्रदान करता है, इसके लिए सूर्य रत्न धारण करना चहिए। मंगल चतुर्थ व नवम भावों का स्वामी  है। अत: मंगल रत्न मूंगा धारण करने से पारिवारिक, सम्पत्ति व भाग्य संबंधी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है। बुध धनेश व आयेश होकर धन के लिए प्रमुख ग्रह होगा तथा धन संबंधी समस्याओं के लिए बुध रत्न पन्ना धारण कर सकते हैं परन्तु बुध द्वितीयेश होकर मारक प्रभाव भी रखता है। इस कारण वृद्धों को पन्ना धारण नहीं करना चाहिए। सिंह लग्न वाले जातकों को पुत्र संतान प्राप्ति के लिए पूजा-पाठ व गुरु रत्न पुखराज धारण करना लाभप्रद होगा।

कन्या लग्न : कन्या लग्न के जातकों के लिए बुध लग्न व दशम् भाव का स्वामी होकर शुभ ग्रह बन जाता है। व्यवसाय, लेखन, राज्य से इत्यादि सफलताओं के लिए बुधरत्न पन्ना धारण करना शुभ रहेगा। धन व भाग्य संबंधी सफलताओं के लिए तथा पैतृक सम्पत्ति से लाभ के लिए शुक्र रत्न हीरा या उपरत्न धारण कर सकते हैं। आय के नए स्रोतों व आय वृद्धि के लिए ठोस चांदी धारण करनी चाहिए। कन्या लग्न वालों के लिए शनि पंचम व षष्ठम् भाव का स्वामी होता है, यदि कुंडली में शनि निर्बल हो तो शनि रत्न नीलम धारण नहीं करना चाहिए। कन्या लग्न में चन्द्र रत्न मोती धारण करने से श्वास संबंधी समस्या हो सकती है।

तुला लग्न : राज्य से लाभ, प्रतिष्ठा व ख्याति के लिए तुला लग्न वालों के लिए चन्द्र रत्न मोती धारण करना लाभदायक है। भाग्य संबंधी बाधाओं व उच्चशिक्षा में आ रही अड़चनों के लिए बुधरत्न पन्ना धारण करना लाभप्रद होगा। तुला लग्न में शुक्र लग्न का स्वामी होता है अत: शुक्र रत्न हीरा धारण करने से सुख ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी। तुला लग्न में शनि चतुर्थ एवं पंचम स्थान का स्वामी होकर योग कारक ग्रह बन जाता है इसलिए तुला लग्न वालों को शनि रत्न नीलम धारण करने से धन सम्पत्ति, भूमि, वाहन, शिक्षा, संतान, प्रतिष्ठा आदि कार्यों में सफलता प्राप्त होगी।

वृश्चिक लग्न : वृश्चिक लग्न के अनुसार सूर्य दशम भाव का स्वामी होकर राज्य से लाभ, प्रतिष्ठा मान, राज्य पक्ष से सफलताओं के लिए सूर्य रत्न माणिक धारण करना चाहिए। उत्साह में कमी, रोग व डर के लिए मंगल रत्न मूंगा धारण कर सकते हैं। संतान सुख, धन व पारिवारिक परेशानियों के लिए गुरु रत्न पुखराज पहनना चाहिए।

धनु लग्न : धनु लग्न वालों के लिए सूर्य भाग्य का स्वामी होता है अत: माणिक धारण करना चाहिए। धनु लग्न के लिए गुरु लग्न व चतुर्थ भाव का स्वामी होने के कारण शुभ हो जाता है, जीवन में चल-अचल सम्पत्ति, प्रतिष्ठा व शिक्षा में सफलता के लिए गुरु रत्न पुखराज धारण करना चाहिए। संतान, विद्या व प्रतिष्ठा के लिए मंगल रत्न मूंगा धारण करें।

मकर लग्न : मकर लग्न के जातकों के लिए बुध भाग्य स्थान का स्वामी होकर शुभता प्रदान करता है। शुभ कार्यों व उच्च शिक्षा में अड़चनों को दूर करने के लिए बुध रत्न पन्ना धारण करना चाहिए। शुक्र पंचम व दशम भाव का स्वामी होकर शुभ ग्रह हो जाता है। संतान सुख, ऐश्वर्यशाली, जीवनयापन व आध्यात्मिक उन्नति के लिए शुक्र रत्न हीरा धारण करना लाभप्रद है। उच्च सफलताओं, स्थिरता के लिए शनि रत्न नीलम धारण करें।

कुंभ लग्न : कुंभ लग्न के लिए परीक्षाओं में सफलता, संतान व एकाग्रता में वृद्धि के लिए पन्ना धारण करें। जीवन में मान-प्रतिष्ठा, स्थायित्व, उच्चाधिकार व संघर्षों को समाप्त करने के लिए शनि रत्न नीलम धारण करें। कुंडली में शनि की निर्बल स्थिति में नीलम पहनें। शुक्र चतुर्थ व नवम भाव का स्वामी होकर शुभ ग्रह हो जाता है अत: भाग्य वृद्धि व श्रेष्ठता के लिए शुक्र रत्न हीरा या सफेद पुखराज पहनना लाभप्रद है।

मीन लग्न : मीन लग्न के जातकों को गुरु रत्न धारण करने से जीवन में प्रतिष्ठा, मान ,राज्य से लाभ व उच्च सफलताएं प्राप्त होंगी। गुरु लग्नेश व दशमेश होकर ऊंचाइयां प्रदान करता है। संतान, शिक्षा में सफलता व मानसिक शांति के लिए चन्द्र रत्न मोती धारण करें। भाग्य वृद्धि, पैतृक सम्पत्ति व उच्च स्तरीय सफलताओं के लिए मंगल रत्न मूंगा पहनें चूंकि मूंगा मीन लग्न वालों के लिए भाग्य रत्न होता है। कुंडली में मंगल की निर्बल अवस्था में मूंगा अवश्य धारण करें व मंगल संबंधी उपाय भी करें।

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