पितृ पक्ष में कौए और कुत्ते को ही भोजन देना क्यों माना गया है शुभ, जानिए यह रोचक तथ्य ?

हिंदू धर्म ग्रंथों के मुताबिक, आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से अमावस्या तक की अवधि को श्राद्ध पक्ष अथवा पितृ पक्ष माना जाता है। ऐसा माना गया है कि पितृ पक्ष के दौरान किए गए कर्मों से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।

गरूण पुराण में वर्णित है कि पितर लोग पितृ पक्ष में अपने परिवार के करीब आज जाते हैं, और करीब 16 दिनों तक धरती पर ही रहते हैं। इसलिए शुभ और मांगलिक कार्यों को त्यागकर हम अपने पितरों के प्रति सम्मान और एकाग्रता कायम रख सकते हैं।

पितृ पक्ष में कौए और कुत्ते का महत्व

दोस्तों, आपको जानकारी के लिए बता दें कि पितृ पक्ष में पितरों के अलावा कौए, कुत्तों, गाय तथा ब्राह्राण को ग्रास निकालने की परंपरा है।

-हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है, इसलिए गाय का महत्व है।

-इसके अलावा पितृ पक्ष में पितर लोग कुत्ते और कौए का रूप धारण कर लेते हैं, ऐसे में इन्हें ग्रास देने का विधान है। इस अवधि में यह परंपरा निभाने की खास जरूरत होती है।

– ऐसा माना जाता है कि यदि पितृ पक्ष में कौआ गाय की पीठ अपनी चोंच रगड़ता हुआ दिखाई दे, समझिए आपको उत्तम भोजन की प्राप्ति होगी।

– कौए की चोंच में सूखा तिनका दिखे तो आपको धन लाभ की प्राप्ति होगी।

– इतना ही नहीं कौआ यदि सूअर की पीठ पर बैठा हुआ नजर आए तो अपार धन की प्राप्ति होती है।

– कौआ यदि मकान की छत या फिर हरे भरे वृक्ष पर जाकर बैठे तो अचानक धन लाभ होता है।

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