मध्य प्रदेश की सरकार ने राज्य के 13 जिलों की 110 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है…..

अटरिया की आबादी लगभग 3 हज़ार है, पर वहां पानी का एक मात्रा स्त्रोत वही कुआँ है. बुंदेलखंड के 80 प्रतिशत किसानों के पास गांव में रोजी-रोटी कमाने का कोई ठीक-ठाक जरिया नहीं है. इनमें से 65 प्रतिशत किसान तो रोजगार की तलाश में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और गुजरात पलायन कर चुके हैं.आधिकारिक तौर पर मध्य प्रदेश की सरकार ने राज्य के 13 जिलों की 110 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है. इनमें बुंदेलखंड के पांच जिले भी शामिल हैं. पिछले साल इस इलाके में बमुश्किल ही थोड़ी बहुत बरसात हुई थी.

हकीकत तो ये है कि मध्य प्रदेश की कमोबेश सभी नदियां, राज्य की लाइफ लाइन कही जाने वाली नर्मदा नदी तक, सूख रही हैं. इसकी वजह बहुत कम बारिश होना है. नर्मदा में पानी तभी दिखाई देता है, जब इस पर बनाए गए तमाम बांधों में से पानी छोड़ा जाता है. जन स्वास्थ्य और अभियांत्रिकी विभाग की मंत्री कुसुम मेहदेले कहती हैं, ‘इस संकट से निपटने की पुरजोर कोशिश हो रही है. जहां भारी किल्लत है, वहां सरकार की तरफ से पानी पहुंचाया जा रहा है. लेकिन कई जगह तो भूगर्भ जल के स्रोत भी सूख गए हैं.

मध्य प्रदेश में स्थित बुंदेलखंड पिछले पांच सालों से पानी के लिए तरस रहा है, ग्लोबल वार्मिंग की मार झेल रहा यह गरीब इलाका लगातार चौथी बार सूखे की चपेट में है. यहाँ तापमान 46 डिग्री पहुँच गया है, वहीं तालाब, नदियां. जलाशय आदि सूख चुके हैं. टीकमगढ़ जिले के एक गांव अटरिया के लोग जान की बाजी लगाकर बहुत पुराने एक कुएं से पानी निकालते हैं. वो कुएं के अंदर जाने के लिए बनी पत्थर की सीढ़ियों से उतरते हैं. इसके लिए वो मानव श्रृंखला बनाने, ताकि एक-दूसरे का हाथ पकड़कर नीचे तक जाएं, फिर एक-एक करके सबके बर्तन पानी से भरे जाते हैं.

 

Facebook Comments