मध्यप्रदेश के बाद अब राजस्थान में भी रेप करने वालों को मिल सकेगी फांसी, सदन ने लगाई मुहर

राजस्थान की विधानसभा में महिला दिवस के दूसरे ही दिन शुक्रवार को महिलाओं को एक कानूनी सहारा मिला। विधानसभा में नाबालिग से दुष्कर्म के दोषियों को मृत्युदंड देने में आ रही कानूनी बाधाओं को दूर करने के लिए दंड विधियां राजस्थान संशोधन विधेयक पास कर दिया है। विधेयक में आपीसी की 376 क और 375घघ दो नई धाराएं जोड़ी गई है। 376घ में सामूहिक दुष्कर्म को शामिल किया गया है। यह विधेयक सदन से पारित हो चुका है और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह विधेयक कानन की शक्ल ले लेगा।

इस प्रकार का बिल पास करने वाला राजस्थान मध्यप्रदेश के बाद दूसरा राज्य है। कानून बनने के बाद सामूहिक दुष्कर्म में शामिल प्रत्येक व्यक्ति को फांसी दी जा सकेगी। गौरतलब है कि सीएम वसुंधरा राजे ने सदन में बहस के दौरान इस प्रकार के कानून की बात कही थी। राजस्थान में पिछले साल रेप के करीब 3300 मामले सामने आए थे। गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने के विधानसभा में विधेयक पारित होने के बाद बताया कि राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह विधेयक कानून के रूप में प्रदेश में लागू हो जाएगा। इससे बच्चियों के साथ होने वाले घिनौने कृत्य पर लगाम लगेगी। अपराधियों में खौफ पैदा होगा।

दरअसल राज्य में कई मासूमों की रेप के बाद हत्या करने के कई मामले सामने आए थे जिससे वसुंधरा सरकार की बहुत आलोचना हुई थी। रही कसर एनसीआरबी के आंकड़ों ने पूरी कर दी जिसमें 12 साल से कम उम्र वाल बच्चियों के साथ रेप के मामले में राजस्थान टॉप पर था। इस बिल पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के बाद राज्य में 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के रेप के दोषियों को फांसी होने का रास्ता साफ हो जाएगा। हालांकि राजस्थान से पहले मध्यप्रदेश में इस प्रकार का कानून बन चुका है।

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