मंदिर की घंटी बजाने से नकारात्‍मक और बुरी शक्तियां होती हैं दूर…

मंदिर को भगवन का घर कहा जाता है. मंदिर जाने के अपने कुछ नीयम होते हैं, और मंदिर में उन नियमों का पालन करना होता है. मंदिर के द्वार पर और विशेष स्थानों पर घंटी या घंटे लगाने का प्रचलन प्राचीन काल से ही रहा है. लेकिन इस घंटे या घंटी लगाने का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व क्या है? कभी आपने सोचा कि यह किस कारण से लगाई. हिंदू धर्म में बहुत सारे ऐसे काम हैं जिन्‍हें व्‍यक्ति करता रहता है लेकिन उसके पीछे के कारणों के बारे में नहीं जानता. आज हम आपको ऐसी ही एक बात बताने जा रहे हैं.

मंदिर में घंटी लगाने की प्रथा काफी पुरानी है और प्राचीन काल से ही देवालयों और मंदिरों में घंटी लगाने की शुरुआत हो चुकी थी. इसके पीछे का कारण बताया जाता है कि जिन स्‍थानों पर घंटी की आवाज नियमित तौर पर आती रहती है. वहां का वातावरण हमेशा पवित्रता का अनुभव कराता है. इसे इस प्रकार भी कहा जा सकता है कि वहां से नकारात्‍मक और बुरी शक्तियां निष्क्रिय हो जाती है और आप हल्‍का महसूस करने लगते हैं.

 

यही वजह है कि सुबह और शाम जब भी मंदिर में पूजा या आरती होती है तो एक लय और विशेष धुन के साथ घंटियां बजाई जाती हैं जिससे वहां मौजूद लोगों को शांति और दैवीय उपस्थिति की अनुभूति होती है. लोगों का ऐसा मानना है कि घंटी बजाने से मंदिर में स्थापित देवी-देवताओं की मूर्तियों में चेतना जागृत होती है जिसके बाद उनकी पूजा और आराधना अधिक फलदायक और प्रभावशाली बन जाती है.

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