क्या आपको पता है कि आखिर क्या होता है मंगलदोष, अगर नहीं तो यहांं जानें

हर व्यक्ति के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पल वह होता है, जब उसका विवाह किसी से तय हो जाता है, विवाह के तय हो जाने के बाद वर-वधु की कुंडली मिलाई जाती है, जिसमे दोनों के गुणों का मिलान किया जाता है. जिन वर-वधु के 36 से 18 गुण मिलते है, विवाह के बाद वह सुखी वैवाहिक जीवन व्यातीत करते है.. लेकिन कुछ व्यक्ति ऐसे होते है, जिनकी कुंडली में दोष होता है, जिसके कारण उनके विवाह में बाधाएं उत्पन्न होती है.

ज्योतिष शास्त्र में कुछ ऐसे ही दोषों का उल्लेख किया गया है, जिसके कारण व्यक्ति का विवाह देरी से होता है और यदि बिना कुंडली व गुणों के मिलान से व्यक्ति का विवाह हो भी जाता है, तो उसके जीवन में कई प्रकार की गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो जाती है तथा जीवन भर वह किसी न किसी समस्या से जूझते रहता है. तो आइये जानते है कुंडली के वह दोष कौन से है? जिससे उसे जीवन भर समस्या का सामना करना पड़ता है.

मंगल दोष – जब किसी व्यक्ति की कुंडली के प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम व द्वादश भाव में मंगल ग्रह विराजमान होता है, तो वह व्यक्ति मंगलदोष से पीड़ित होता है. ऐसे व्यक्ति को मांगलिक कहते है. इन व्यक्तियों को अपने ही समान मांगलिक व्यक्ति से ही विवाह करना उचित होता है.

मंगलदोष दूर करने का उपाय – जिस व्यक्ति की कुंडली में मंगलदोष होता है, उन्हें मंगला गौरी व वट सावित्री का व्रत करने से मंगलदोष दूर होता है. बरगद के वृक्ष में मीठा दूध चढ़ाने व इसका प्रसाद के रूप में सेवन करने से भी मंगलदोष से मुक्ति मिलती है. यदि मंगलदोष से ग्रसित व्यक्ति गरीबों को मीठी रोटी दान करता है या उन्हें मीठी रोटी का सेवन करवाता है, तो इससे भी मंगल दोष समाप्त होता है.

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