यहां महिलाओं को नहाने के लिए लेनी पड़ती है मर्दों की इजाजत

हमारे देश में लड़कियों को बचपन से ही कई तरह की पाबंदियां लगा दी जाती हैं। तुम ये नहीं कर सकती, तुम वो नहीं कर सकती… तुम लड़की हो ऐसा नहीं करोगी वगैरह… वगैरह।

लेकिन क्या कभी सोचा है कि दुनिया के सबसे अमीर देशों की लिस्ट में शामिल एक ऐसा देश भी है, जहां लड़कियों पर 5-10 नहीं हजारों तरह की पाबंदियां हैं। उस देश में महिलाओं का जीवन कैसा होता है, शायद किसी ने भी सोचने की कोशिश न की हो।

चलिए आज हम आपको बताते हैं उस देश के बारे में जहां महिलाओं को अब कुछ मामलों में छूट मिलने लगी है। हालांकि, दुनिया में अभी भी इस मुल्क की महिलाएं सबसे ज्यादा मजबूर हैं। ये देश और कोई नहीं बल्कि तेल और सोने का बड़ा भंडार कहलाने वाला संयुक्त अरब अमीरात है। यहां महिलाओं पर इतनी पाबंदियां है कि यहां किसी महिला का जीवन आसान नहीं है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी आम चीजें करने के लिए भी यहां की औरतों को पुरुषों की इजाजत लेनी पड़ती है। दरअसल, सऊदी में संरक्षण पद्धति के नाम पर महिलाओं को सालों से बांध कर रखा गया है। सऊदी की पद्धति के मुताबिक, महिलाओं को किसी एक आदमी के संरक्षण में रहना जरूरी है। यह संरक्षण महिला के पिता, भाई, पति या कोई दूसरा रिश्तेदार भी हो सकता है। आपको ये जानकर झटका जरूर लगेगा कि कई बार 5 से 6 साल के लड़के को भी 25-30 साल की महिला का संरक्षक बना दिया जाता है।

इसी पद्धति के तहत महिलाओं को रोजमर्रा के कामों में भी मर्दों की इजाजत लेनी पड़ती है। यहां तक कि महिलाएं अपनी मर्जी से नहा भी नहीं सकती। उन्हें नहाने के लिए और मेकअप करने जैसी छोटी-छोटी चीजों के लिए भी पुरुषों की इजाजत लेनी पड़ती है। आपको ये भी जानकर हैरानी होगी कि सऊदी अरब के कानून में कहीं भी संरक्षण पद्धति का जिक्र नहीं है। लेकिन फिर भी यहां के लोग व्यावहारिक स्तर पर इसका कड़ाई से पालन करते हैं।

सऊदी में अगर किसी महिला पर जुल्म हो और वो पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराने जाए तो पुलिस के कई सवालों का सामना करना पड़ता है। महिला से पूछा जाता है कि आप रिपोर्ट दर्ज करवा रहीं है, क्या आपके संरक्षक ने इसकी इजाजत दी है या नहीं। पिछले साल तक सऊदी में कोई भी महिला नौकरी नहीं कर सकती थी, सर्जरी नहीं करवा सकती थी, गाड़ी नहीं चला सकती थी। हालांकि, सऊदी में अब बदलाव का दौर शुरू हो गया है। महिलाओं को यहां नौकरी करने की इजाजत मिल चुकी है, वो अब सर्जरी करवा सकती हैं, गाड़ी चला सकती हैं.. सिनेमाहाल में फिल्म देख सकती हैं।

यहां महिलाओं के पहनावे पर भी कड़ी निगरानी रखी जाती है। सऊदी में सख्ती से शरिया ड्रेस कोड महिलाओं के लिए निर्धारित हैं। ज्यादातर औरतें हिजाब और अबाया पहनती हैं। जरूरी नहीं कि चेहरा ढका हुआ हो लेकिन सज संवरकर बाहर निकलना अभी भी सऊदी में पाबंदी है। इसके साथ ही साथ महिलाएं किसी दूसरे मर्द से ज्यादा बातचीत करे तो उसे मुसीबत झेलनी पड़ती है। सार्वजनिक जगहों पर भी महिलाओं और पुरुषों के बीच भेदभाव किया जाता है। दोनों के लिए बैठने के लिए अलग-अलग जगह बनी हैं।

यहां किसी भी तरह से मेलजोल को लेकर आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है जिसमें पुरुष से कई गुना ज्यादा सजा महिला को मिलती है। कुछ साल पहले सऊदी में बलात्कार से जुड़े एक मामले ने पूरी दुनिया का ध्यान बटोरा था। रेप के इस मामले में पुरुष के साथ महिला को भी सजा का पात्र माना गया। जब इसके पीछे की वजह सामने आई तो पता चला कि महिला पर आरोप लगाया कि वो देर रात बाहर क्या कर रही थी?

कुछ साल पहले वरिष्ठ पत्रकार और समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एडिटर आर्लेंड गेट्ज ने सऊदी में हुए अपने एक अनुभव को साझा किया था। उन्होंने लिखा, मैं रियाद के एक महंगे होटल में ठहरी हुई थी। वहां एक स्वीमिंग पूल था, लेकिन होटल स्टॉफ ने मुझे वहां देखने भी नहीं दिया गया। मुझे बताया गया कि वहां पुरुष स्विमसूट में हैं और आप उधर न तो देख सकती हैं और न जा सकती हैं।

2015 में सऊदी अरब ने महिलाओं के बगैर ओलंपिक खेलों की मेजबानी का प्रस्ताव रखा। लंदन 2012 में सऊदी ने पहली बार दो महिला खिलाड़ियों को भेजा जिसका कड़ा विरोध किया गया। कट्टरपंथी गुटों ने उन महिलाओं को वेश्या तक कह डाला। महिलाएं पुरुष संरक्षक के साथ गई और सिर ढककर हिस्सा लिया। हालांकि 2017 में सऊदी ने अपने राष्ट्रीय स्टेडियम में महिलाओं के आने पर लगी पाबंदी को हटा दिया।

Facebook Comments