मांस खाने वाले हो जाओ सावधान नहीं तो होना पड़ेगा कैंसर का शिकार ……

अमेरिकन सोसायटी की जून 2011 की रिपोर्ट के अनुसार आर्सनिक को इसलिए अप्रूव किया गया था क्योंकि ये इन्टेस्टनल पैरासाइट को मारकर मीट को पिंक बनाता है। इसको प्रोड्यूस करने वाले लोगों ने दावा किया था इससे एनिमल खाने वाले लोगों को कोई नुकसान नहीं होगा।

डेली हेल्थ पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के Food and Drug Administration ने इस बात को कंफर्म कर दिया है कि चिकन में कैंसर के लिए जिम्मेदार कॉम्पोनेंट आर्सनिक पाया जाता है।

 

क्या होता है आर्सनिक-
आर्सनिक एक फोटो सेंसिटव मॉलिक्यूल होता है जो कि बॉडी के अंदर कैंसर सेल्स को डेवलप कर देता है। इससे कैंसर सेल्स की ऑटोम्यूटेशन शुरू हो जाती है। जिससे एक बाद चार गुना कैंसर सेल्स बॉडी में बनने लगती हैं। होली के रंग, जंगली घास आदि में ये तत्व पाया जाता है।

WHO की रिपोर्ट के अनुसार आर्सनिक एक नेचुरल कंपोनेंट है जो कि हवा, पानी और लैंड के जरिए डिस्ट्रीब्यूट होता है। यह पानी और फसलों के द्वरा भी बॉडी में पहुंचता है।

 

बना कैंसर का कारण
अमेरिकन कैंसर सोसायटी ने कई ऐसी एक्जाम्पल दिए हैं जिनमें आर्सनिक का हाई लेवल बहुत सारे कैंसर का कारण बना है। उन्होंने दो रिपोर्ट्स में आर्सनिक और कैंसर के बीच के संबंध को बताया है। स्टडीज में ऐसे लोगों के बारे में बताया गया है जो पेस्टीसाइड ( इनमें आर्सनिक पाया जाता है) का काम लंबे समय से कर रहे हैं। उन लोगों में लंग कैंसर होने चांजेस ज्यादा पाए गए हैं।

यहां पानी में भी होता है ये मॉलिक्यूल :

साउथ अमेरिका और साउथईस्ट एशिया की स्टडी के मुताबिक इन देशों में पानी में आर्सनिक बहुत ज्यादा पाया जाता है जो कि ब्लैडर, स्किन और लंग कैंसर का कारण बनता है।

 

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