इस तरह हो रही मिड डे मील में घपलेबाजी

नॉर्थ एमसीडी के 715 स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 2 लाख 78 हजार 681 है, लेकिन हैरान करने वाला तथ्य यह है कि रोजाना 3.28 लाख बच्चों को मिड-डे मील दिया जा रहा है। इस तथ्य पर बुधवार को एमसीडी की स्टैंडिंग कमिटी की मीटिंग में जमकर हंगामा हुआ। सवाल उठ रहा है कि बच्चों की संख्या कम है तो मिड-डे मील अधिक क्यों तैयार किया जा रहा है।

मीटिंग में कांग्रेस पार्षद मुकेश गोयल ने मिड-डे मील का मुद्दा उठाया। अधिकारियों से जवाब मांगा कि मौजूदा समय में नॉर्थ एमसीडी के स्कूलों में कितने बच्चे बढ़ते हैं और उनमें से कितनों को मिड-डे मील दिया जा रहा है। शिक्षा विभाग के अफसरों ने जवाब दिया कि अभी एमसीडी स्कूलों में करीब 2 लाख 78 हजार 681 बच्चे पढ़ते हैं। जबकि 3.28 लाख बच्चों को मिड-डे मील दिया जा रहा है। इस तरह बच्चों की संख्या की तुलना में रोजाना 50 हजार अतिरिक्त बच्चों के लिए मिड-डे मील तैयार होता है। जवाब सुनते ही मीटिंग में हंगामा खड़ा हो गया।

पार्षदों का आरोप था कि मिड-डे मील तैयार करने में भी भारी गड़बड़ी है। इसकी जांच होनी चाहिए। अफसरों ने यह भी बताया कि पिछले 3 साल में मिड-डे मील पर 44.16 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। सवालों में उलझने पर शिक्षा विभाग के अफसरों ने लीपापोती करना शुरू कर दिया। अफसरों ने बताया कि रोजाना बच्चों की अटेंडेंस के हिसाब से ही मिड-डे मील तैयार किया जाता है। इस पर पार्षदों ने पूछा कि जिन 11 एजेंसियों को मिड-डे मील तैयार करने का काम दिया गया है, वह रोज कैसे पता लगाती हैं कि कितने बच्चे स्कूल में मौजूद थे, कितने नहीं।

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