देखते ही देखते वो लड़की आज भारत का गौरव बन चुकी,भारत की मिसाइल वुमन की कहानी….

देखते ही देखते वो लड़की आज भारत का गौरव बन चुकी है। जी हां, हम बात कर रहे हैं भारत की मिसाइल वैज्ञानिक और अग्नि मिसाइलों की प्रोजेक्ट डॉयरेक्टर डॉ. टेसी थॉमस की। अग्नि पुत्री के नाम से मशहूर डॉ. टेसी थॉमस दुनिया की उन चंद मिसाइल वैज्ञानिकों में शामिल हैं, जो इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल यानि ICBM का नेतृत्व कर रही हैं। इन्हीं की देखरेख में तैयार की गई अग्नि-5 मिसाइल का परीक्षण किया गया है। आज हम डॉ. टेसी थॉमस को सलाम करते हुए उनसे जुड़े कुछ दिलचस्प पहलू लेकर आए हैं।

एक समय IPS अफसर बनने के लिए सिविल सर्विस का एग्जाम देने वाली डॉ. थॉमस एक सफल पत्नी, एक सफल मां और एक सफल वैज्ञानिक हैं। उन्होंने सिविल सर्विस का एग्जाम तो दिया, लेकिन उनका मन तो सिर्फ और सिर्फ ऊंची उड़ान भरने का था। 1964 में केरल के एक छोटे से कैथोलिक ईसाइ परिवार में इनका जन्म हुआ। मदर टेरेसा के नाम से प्रभावित पिता और मां ने उन्हें टेसी नाम दिया। टेसी का बचपन ISRO की लांच साइट के करीब गुजरा। वो रोज आसमान में उड़ते रॉकेटों को देखकर खुश होती थी, लेकिन मां-बाप को क्या पता था कि उनकी बेटी इससे भी ऊंची उड़ान भरने वाली है

डॉ. थॉमस ने कुछ साल पहले एक इंटरव्यू में कहा था, जब मैं छोटी थी उस वक्त नासा के अपोलो मिशन की तैयारियां चल रही थी। टीवी तो था नहीं, लेकिन रेडियो और अखबारों में रोज वही चर्चा होती रहती थी। अपोलो मिशन शुरू हुआ और नासा का रॉकेट चांद पर उतरा। रोजाना उस यान के खबरें सुनकर डॉ. थॉमस को प्रेरणा मिल रही थी। कौन जानता था कि छोटी सी उम्र में ऊंची उड़ान का सपना देखने वाली डॉ. थॉमस एक दिन भारत की सबसे सफल रॉकेट साइंटिस्ट बन जाएगी।

डॉ. थॉमस ने अपने इंटरव्यू में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को अपना गुरू बताया था। उन्होंने कहा था- डॉ. कलाम मेरे गुरू हैं और वो मेरे डॉयरेक्टर भी हैं। 1988 से मैं उनके साथ काम कर रही हूं और अग्नि मिसाइलों के लिए गाइडेंस प्रोग्राम बना रही हूं। डॉ. थामस ने ये इंटरव्यू साल 2011 में दिया था, उस वक्त डॉ. कलाम जीवित

आपको बता दें कि टेसी थॉमस न सिर्फ एक सफल रॉकेट साइंटिस्ट हैं, बल्कि उन्होंने भारत या यूं कहें कि इसरो के कई अंतरिक्ष प्रोजेक्टों को सफल बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ये बात भी बहुत कम लोग जानते होंगे की डॉ. थॉमस के पति सरोज कुमार भारतीय नौसेना में कमांडर है। सरोज और डॉ. थॉमस का बेटा तेजस एक मशहूर ऑटाे इंजीनियर है। इसे संयोग कहें या फिर डॉ. थॉमस को दिया गया एक छोटा सा सम्मान… भारत में बने पहले स्वदेशी फाइटर जेट को भी तेजस नाम दिया गया है।

साल 1988 से अग्नि प्रोजेक्ट में काम करने वाली और बाद में उस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी संभालने वाली डॉ. थॉमस को इसी वजह से आज मिसाइल वुमन और अग्नि पुत्री कहा जाने लगा। साल 2008 में भारतीय महिला वैज्ञानिक एसोसिएशन ने डॉ. थॉमस के सम्मान में कहा था कि एक मां से लेकर एक वैज्ञानिक के रोल में डॉ. टेसी थॉमस बेमिसाल हैं और पूरी दुनिया को उनसे सीखना चाहिए। भारत के मिसाइल कार्यक्रम में अपने योगदान के लिए लाल बहादुर शास्त्री सम्मान से सम्मानित हो चुकी डॉ. थॉमस को ग्वालियर की ITM यूनविर्सिटी D.Sc. से सम्मानित कर चुकी है।

आपको बता दें कि भारत ने आज ही अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण किया जिसकी रेंज 5000 किमी तक है। ये भारत की सबसे आधुनिक मिसाइल है। 5000 KM की रेंज वाली इस मिसाइल की क्षमता आने वाले समय में 8000 KM तक बढ़ाई जा सकती है। डॉ. टेसी थॉमस को जब अग्नि मिसाइल प्रॉजेक्ट को लीड करने की जिम्मेदारी दी गई, तब वो देश की मशहूर मिसाइल साइंटिस्टों में टॉप पर थी।

उनकी अगुवाई में साल 2006 में अग्नि-3 मिशन फेल हो गया। इसके बाद उस मिशन की काफी आलोचना हुई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने काम पर पूरा ध्यान लगाया। आज उन्हीं की बदौलत अग्नि-5 मिसाइल को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया। आज भारत इंटर कॉन्टिनेंटल मिसाइल सिस्टम (ICBM ) की क्षमता से लैस ऐसा विश्व में पांचवा देश है जो 5,000 कि. मी. तक अपनी मिसाइल की मार से किसी भी शत्रु को उसके घर में ही ढेर कर सकता है। यह मिसाइल भारत को सुरक्षित रखने में सक्षम है और इसका पूरा श्रेय डॉ. टेसी थॉमस को ही जाता है।

Facebook Comments