Mission 2019 : विश्वास करने से पहले बजट दस्तावेज ध्यान से पढ़ लें

केंद्र की मोदी सरकार ने अपने आखिरी बजट (पेश तो अंतरिम बजट करना था, लेकिन सरकार ने तमाम नियमों और परंपराओं को ताड़ते हुए पूर्ण बजट से भी बढ़-चढ़ कर घोषणाएं कर दीं) में जमकर घोषणाएं कीं और देशवासियों को रिझाने की भरपूर कोशिश की। इसी साल चुनाव होने की वजह से सरकार को पेश तो लेखानुदान (अंतरिम बजट) करना था, लेकिन पूरी योजना के साथ सरकार ने सारी परंपराओं को धता बताते हुए पूर्ण बजट पेश किया। जैसा कि उम्मीद की जा रही थी सरकार ने आम बजट की तरह तमाम लोकलुभावन घोषणाएं की और जमकर अपनी पीठ भी थपथपाई।

बजट में सरकार ने क्या दिया और क्या नहीं, इसपर चर्चा होगी, लेकिन सबसे पहले बात आज के दिन देश के लोकतंत्र के मंदिर यानि संसद की तमाम परंपराओं और संविधान की भावना पर सरकार द्वारा की गई चोट की करते हैं। आज के दिन सरकार ने एक तरह से जाते-जाते संसदीय परंपराओं पर आपना आखिरी वार कर दिया। संसद की तमाम परंपराओं और नियमों को ताक पर रखते हुए आज बीजेपी ने संसद को अपनी पार्टी की नुक्कड़ सभा में तब्दील कर दिया।

शुक्रवार को वित्त मंत्री पीयूष गोयल के बजट भाषण से पहले जब बीजेपी के सदस्य संसद भवन में पहुंचे तो सारी शालीनताओं को भूल गए और काफी देर जय श्रीराम का उद्घोष करते रहे। बीजेपी और मोदी सरकार ये भूल गई कि संसद लोकतंत्र का मंदिर है, जहां उस संविधान के नियमों का पालन होता है जो धर्मनिरपेक्षता और पंथ निरपेक्षता की बात करता है।

इतना ही नहीं बजट भाषण के दौरान मोदी सरकार के मंत्रियों और बीजेपी सासंदों ने अब तक के बजट की तमाम परंपराओं को पैरों तले रौंद दिया। बजट भाषण के दौरान बीच-बीच में बीजेपी के नेता वाह-वाह का उद्घोष करते रहे, मानो बजट भाषण नहीं कोई मुशायरा हो रहा हो और पीयूष गोयल शेर और गजलें सुना रहे हों। बजट भाषण के दौरान पीएम मोदी का नया जुमला जोश भी कई बार बीजेपी नेताओं ने जमकर उछाला और फिर खुद ही लपका।

बात यहीं तक रह जाती तो ठीक था, लेकिन हद तो तब हो गई जब बजट भाषण में गोयल ने आयकर सीमा में छूट का ऐलान किया तो करीब 3 मीनट से ज्यादा देर तक सदन में बीजेपी नेता मोदी-मोदी का उदगोष करते रहे। संसद भवन का नजारा कुछ ऐसा लग रहा था मानो बजट भाषण नहीं हो रहा हो किसी नुक्कड़ या चौराहे पर मोदी जी का विदाई कार्यक्रम रखा गया है।

अब बात बजट घोषणाओं की करें तो साफ पता चलता है कि सरकार ने जाते-जाते अपने तरकश के सारे तीर चलाने की पूरी कोशिश की है। एक ओर देश के 12 करोड़ किसानों को सालाना 6000 रुपये (यानि 500 रुपये महीना) देने का ऐलान कर सरकार ने किसानों को सम्मान देने का दावा किया, तो वहीं मध्यम वर्ग को टैक्स में छूट का ऐलान कर झुनझुना थमा दिया। लोकलुभावन बजट में कोई काम की योजना की घोषणा तो नहीं की गई, लेकिन बड़े-बड़े दावों के साथ जुमले जमकर छोड़े गए।

इस बजट की खास बात ये रही कि पिछले कुछ दिनों से हाउ इज़ द जोश का नया नारा उछालने वाली बीजेपी के ज्यादातर नेता इस बजट के दौरान मायूस नजर आए। बजट के दौरान ज्यादातर नेताओं की भाव-भंगिमाओं से उनके अंदर की बेचैनी का साफ अंदाजा हो रहा था। बजट से बीजेपी के सांसद और सरकार के मंत्रियों को कितनी उम्मीद है, उसका अंदाजा इसी बात से होता है कि पूरे भाषण के दौरान कई बीजेपी नेता अपना सिर पकड़े नजर आए। मानों उन्हें खुद भी समझ नहीं आ रहा था आखिर इस बजट में हो क्या रहा है।

Facebook Comments