इलेक्ट्रिक इंजन पर नहीं दिखा मधेपुरा का नाम,बिहार की पहचान छिपाना चाहती है मोदी सरकार….

भारतीय रेल की इतिहास में कल बिहार ने नया कीर्तिमान रचा। मधेपुरा रेल फैक्ट्री से देश को सबसे तेज चलने वाला रेल इंजन मिल गया। लेकिन बिहार को उसका समुचित अधिकार नहीं मिला। मधेपुरा वासियों की मानें तो केंद्र की मोदी सरकार बिहार की पहचान छिपाना चाहती है तभी तो इलेक्ट्रीक रेल इंजन पर मधेपुरा का नाम मेंशन नहीं किया गया है।

 

बिहार के मधेपुरा से भारतीय रेल को सबसे पॉवरफुल इंजन मिल गया। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोतिहारी में सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह कार्यक्रम के दौरान रिमोट से इसका लोकार्पण किया। 12 हजार हॉर्स पावर वाले इस इंजन के साथ ही भारत अब रेल तकनीक में रूस, चीन और जर्मनी के समकक्ष पहुंच गया है। अब तक भारतीय रेल में छह हजार हॉर्स पावर का ही इंजन था। मधेपुरा निर्मित इंजन के शामिल होने के बाद मालगाडिय़ों की स्पीड और माल ढुलाई क्षमता दोगुनी हो गई है। मधेपुरा की गरिमा उर्विशा ने बताया कि हम लोग बेसब्री से जिस मेड इन मधेपुरा रेल इंजन को देखना चाहते थे वो हमें नजर नहीं आया। गरिमा की मानें तो स्थानीय जनप्रतिनिधि रंग-गुलाल लगाने की होड़ में पूरे दिन व्यस्त रहे। इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया। सोशल मीडिया के सहारे कुछ स्थानीय युवाओं ने जब इस बात को उठाया तो यह मामला सामने आया। हालांकि कुछ दिनों पहले फैक्ट्री के प्रशासन द्वारा कहा गया था कि इंजन पर मधेपुरा का नाम जरूर अंकित किया जाएगा।

लेकिन जब आज पहली इंजन को मधेपुरा की फैक्ट्री से प्रधानमंत्री के द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया तो उस इंजन पर ‘मधेपुरा’ का कोइ नामो-निशान मौजूद नहीं था।

फ्रेट कॉरिडोर में होगा इस्तेमाल : मधेपुरा में बने इंजन का इस्तेमाल गुड्स ट्रेन में किया जाएगा। ईस्टर्न-वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर में रेलवे को हाई स्पीड ट्रेन चाहिए थी। मधेपुरा निर्मित इंजन ने इसकी भरपाई कर दी है। कॉरिडोर का निर्माण कार्य जारी है।

 

भारत के मालगाडिय़ों की बढ़ेगी रफ्तार : अब तक मालगाडिय़ों की औसत रफ्तार 25 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की थी। मधेपुरा इंजन से मालगाडिय़ों की औसत रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे हो जाएगी। मधेपुरा में बने इंजन की अधिकतम सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटे की है।

छह हजार टन ढुलाई की क्षमता : इस इंजन से भारी वजनी मालगाडिय़ों को भी चलाया जा सकेगा। अब तक तीन हजार टन वजन वाली गाडिय़ों को ही खींचा जा सकता था। इससे ज्यादा वजन के लिए दो इंजन लगाने पड़ते थे। मधेपुरा निर्मित इंजन छह हजार टन लेकर चल सकेगी।

 

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर कहा है कि मधेपुरा में बनी इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव फैक्ट्री और 12,000 हॉर्स पॉवर शक्ति के लोकोमोटिव इंजन का शुभारंभ प्रधानमंत्री द्वारा किया गया। इससे रोजगार, उद्योगों को बढ़ावा, तेज गति से माल ढुलाई, और क्षेत्र का विकास सुनिश्चित होगा।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया है कि मधेपुरा में इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव फैक्ट्री के फेज वन का भी लोकार्पण किया गया है। ये फैक्ट्री दो कारणों से अहम है। एक तो ये मेक इन इंडिया का उत्तम उदाहरण है। इस कारखाना क्षेत्र में रोजगार का भी बड़ा माध्यम बन रही है।

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