जी हां! देश के करोड़ों पेंशन धारकों को मोदी सरकार का तोहफा

नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने पेंशन स्कीम में किया बड़ा बदलाव किया है। अगर आप अपनी नौकरी की शुरुआत में ही समझदारी से एक तय रकम के साथ बचत करना शुरू कर दें तो आपका भविष्य पूरी तरह से सुरक्षित हो सकता है। भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) एक बेहतर विकल्प के रूप में उभर कर सामने आया है।
इस स्कीम का फायदा सरकारी ही नहीं निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारी भी उठा सकते हैं। अब सरकार ने इस स्कीम में बड़ा बदलाव किया है। इस बदलाव का फायदा केंद्र और राज्य के करोड़ों सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा।
दरअसल, नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) एक रिटायरमेंट सेविंग्स अकाउंट है। इसकी शुरुआत भारत सरकार ने 1 जनवरी, 2004 को की थी। पहले यह स्कीम सिर्फ सरकारी कर्मचारियों के लिए शुरू की गई थी लेकिन 2009 के बाद इसे निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए भी खोल दिया गया। बता दें कि एनपीएस अकाउंट खुलवाने के लिए न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम उम्र 65 साल है।
खबर के मुताबिक अभी सरकार ने नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) में अपना योगदान बढ़ाकर कर्मचारियों के मूल वेतन का 14 प्रतिशत कर दिया है। यह योगदान फिलहाल 10 प्रतिशत है। हालांकि सरकारी कर्मचारियों का न्यूनतम योगदान 10 प्रतिशत बना रहेगा।
सरकार ने कर्मचारियों के 10 प्रतिशत तक योगदान के लिए आयकर कानून की धारा 80 सी के तहत टैक्स इन्सेन्टिव को भी मंजूरी दी। फिलहाल सरकार और कर्मचारियों का योगदान एनपीएस में 10-10 फीसदी है, जिसमें सरकार अपना योगदान बढ़ाने जा रही है।
इसके अलाव पीएम मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में सरकारी कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय कुल जमा रकम में से 60 फीसदी निकालने की मंजूरी भी दी गई है, जो फिलहाल 40 प्रतिशत है। साथ ही कर्मचारियों के पास निश्चित आय उत्पादों या शेयर इक्विटी में निवेश का विकल्प भी खोल दिया गया है।
अगर कर्मचारी रिटायरमेंट के समय एनपीएस में जमा रकम का कोई भी हिस्सा निकालने का निर्णय नहीं करता है और 100 प्रतिशत पेंशन योजना में ट्रांसफर करता है तो उसकी पेंशन आखिरी बार मिलने वाले वेतन का 50 प्रतिशत से ज्यादा होगी।

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