ना जाने क्यों कुछ लोग अपनी माँ की अहमियत नहीं समझते……

माँ अपने बच्चों की सांसे होती हैं, माँ उनकी परछाई होती हैं, यदि माँ ही ना होती तो कोई भी इस दुनिया की झलक ना देख पाता. इस बात से तो हर कोई वाकिफ है कि अगर हमारी माँ ना होती तो आज दुनिया में हम भी ना होते… लेकिन फिर भी ना जाने क्यों कुछ लोग अपनी माँ की अहमियत नहीं समझते है. जिस माँ ने हमें जन्म से लेकर बड़े होने तक इतना प्यार दिया उसी माँ के बच्चे उसे दुःख देने में कोई कसर नहीं छोड़ते है.

जो माँ अपने बच्चों को पलंग पर सुलाकर खुद जमीन पर सोती हैं, अपने बच्चों को खाना खिलाकर खुद पानी पीकर ही अपना पेट भर लेती थी उसी माँ को एक दिन बच्चे सड़क पर छोड़ आते है. क्या बीतती होगी उस माँ के दिल पर जब उसी की औलाद अपनी पत्नी को दिल में और घर में खास स्थान देकर अपनी माँ को कही वृद्धाश्रम में छोड़ आते है. लेकिन फिर भी वो बेचारी किसी से ये नहीं कहती कि मेरे बेटे ने मुझे यहाँ छोड़ा है. वहां भी वो सभी से ये कहती है कि एक दिन मेरा बेटा मुझे लेने जरूर आएगा…

बस ये ही आस लगाए वो हर दिन अपने बेटे का इंतजार करती रहती है लेकिन उसका बेटा उसका ये इंतजार कभी पूरा नहीं करता और वो बेबस माँ इंतजार करते-करते ही इस दुनिया को अलविदा कह जाती हैं. लेकिन क्यों…. बच्चे अपनी माँ को इतना दुःख देते हैं. अगर कोई अपनी माँ को जरा-सी ख़ुशी नहीं दें सकता है तो आपको अपनी माँ को दुःख देने का भी कोई हक़ नहीं है.

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