लेन-देन असंभव, क्रिप्टो करेंसी और बिटक्वाइन मुद्रा नहीं : RBI

रिजर्व बैंक ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है क्रिप्टो करेंसी असली मुद्रा नहीं है। वह बिटक्वाइन जैसे आभासी मुद्राओं को मुद्रा नहीं मानता और न ही ऐसा कोई कानून है जो बिटक्वाइन को मुद्रा मानने के लिए बैंक को योग्य बनाता हो। बैंक ने स्पष्ट किया कि इन मुद्राओं के तहत किए गए लेन-देन, भुगतान, निपटारा आदि को कानून का संरक्षण नहीं दिया जा सकता।

बैंक ने हलफनामा दिया
रिजर्व बैंक के सहायक जनरल मैनेजर ने सुप्रीम कोर्ट में दायर ताजा शपथ-पत्र में कहा कि आभासी मुद्राएं ठोस अवस्था में नहीं होती और न ही इन्हें किसी बैंक द्वारा जारी किया गया होता है, इसलिए इन पर कोई कानून लागू नहीं होता है। मुद्रा नियामक ने कहा कि फेमा (विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून) के तहत रिजर्व बैंक को किसी चीज को वैध मुद्रा के रूप में अधिसूचित करने का प्राधिकार है। लेकिन कानून की जरूरत है कि ऐसे इंस्ट्रूमेंट में चेक, पोस्टल आर्डर, मनी आर्डर आदि जैसे गुण होने चाहिए। इसलिए ऐसी अवस्था में बिटक्वाइन को फेमा के तहत मुद्रा घोषित नहीं किया जा सकता।

मुद्रा की परिभाषा में नहीं है
बिटक्वाइन और अन्य आभासी मुद्राएं ठोस अवस्था में भी नहीं होती न ही उन्हें भारतीय रुपये में बदला जा सकता। इसलिए बिटक्वाइन पर भारतीय मुद्रा की परिभाषा विस्तारित नहीं की जा सकती। वहीं ये मुद्राएं किसी बैंक या संप्रभु राष्ट्र द्वारा जारी नहीं की गई हैं, इसलिए इन्हें विदेशी मुद्रा नहीं माना जा सकता। इसलिए इन मुद्राओं को कानूनी और गैरकानूनी मानने का कोई सवाल पैदा नहीं होता।

सभी याचिकाएं खारिज करने का अनुरोधबैंक ने कहा कि उपयोगकर्ताओं, जमाधारकों और व्यावसायियों को इसके खतरों से आगाह कर दिया गया है। रिजर्व बैंक ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया जाए, क्योंकि यह आर्थिक नीति के मामले हैं जिनमें सरकार तथा रिजर्व बैंक को फैसला लेने का कानूनी अधिकार है। याचिकाकर्ताओं के अपने दृष्टिकोण नीतिगत मामलों को चुनौती देने का आधार नहीं हो सकते। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।

मामला
बैंक ने यह जवाब उन तमाम याचिकाओं के जवाब में दिया है, जिनमें कोर्ट से आग्रह किया गया है कि देश में क्रिप्टो करेंसी के व्यवसाय को रोकने का आदेश दिया जाए क्योंकि इससे असामाजिक गतिविधियों के लिए धन का प्रवाह हो सकता है। वहीं कुछ याचिकाएं ऐसी हैं, जिनमें रिजर्व बैंक की 6 अप्रैल की अधिसूचना को चुनौती दी गई है। इस अधिसूचना में रिजर्व बैंक ने अपने अधीन आने वाले वित्तीय संस्थाओं को क्रिप्टो करेंसी में सेवाएं देने से प्रतिबंधित कर दिया था। ये याचिकाएं देश के कई हाईकोर्ट में भी दायर हैं।

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