यह मुस्लिम शख्स 70 साल से कर रहे मंदिर की सेवा…

भारत के लोगों में यह खासियत होती है कि वो धर्म, जाति पर लोग अक्सर एक दूसरे को बांटते हैं।इस धर्म के नाम पर नफरत फैलाने वालों को सोहसा गांव के रामजानकी मंदिर के पुजारी नसीहत दे रहे हैं। तकरीबन 70 साल से भगवान राम तथा माता जानकी की सेवा कर रहे पुजारी हिंदू पंडित नहीं हैं, बल्कि वे मुस्लिम परिवार में जन्मे सदीक मियां हैं।

वे पूरी आस्था और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना तो कर ही रहे हैं। साथ ही, लोगों को रामायण तथा गीता का पाठ भी पढ़ा रहे हैं। गांव के लोग प्रत्येक दिन सुबह उनके भजन की मधुर आवाज से ही दिन की शुरुआत करते हैं। सदीक बाबा उनलोगों के लिए सबक हैं, जो लोग धर्म के नाम पर नफरत फैलाते हैं।

समाज के लिए एकता की मिसाल पेश कर रहे बाबा के प्रति इलाके लोग भी काफी आदर तथा सम्मान का भाव रखते हैं। यह मंदिर जिला मुख्यालय से तकरीबन 25 किलोमीटर दूर सोहसा रामबाग में अवस्थित है। सदीक बाबा बचपन से ही इस मंदिर की सेवा में लगे हैं। अब तो वे काफी बुजुर्ग हो गए हैं, बावजूद राम-जानकी की सेवा से गुरेज नहीं कर रहे हैं।

मूल रूप से गया जिले के खिजरसराय के रहने वाले सदीक मियां ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उन्होंने बताया जब वे तीसरी कक्षा में पढ़ते थे तब सूरज जी महाराज के पास शिक्षा ग्रहण करने के लिए गए थे। उनके प्रेरणा से वे रामभक्ति की ओर उन्मुख हुए। बाद में वे सोहसा गांव आ गए और मंदिर के पुजारी श्यामसुंदर दास के साथ रामभक्ति में रम गए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने आगे बताया कि इस मंदिर की सेवा करना अपना दायित्व समझते हैं। इस काम में खुशी मिलती है और सुख की अनुभूति भी होती है। इतना ही नहीं काशी तथा अयोध्या जैसे कई तीर्थ स्थलों का भी वे भ्रमण कर चुके हैं। अपने पास धर्म ग्रंथों का भंडार भी रखते हैं।

ऐसा नहीं कि उन्हें उर्दू नहीं आता। उर्दू तथा अरबी भाषा की भी अच्छी जानकारी है। वे कहते हैं कि धर्म को थोपा नहीं जाता उसमें आस्था रखने से ही लोगों को मुक्ति मिल सकती है। वर्ष 1949 से लगातार इस मंदिर में पूजा कर रहे सदीक बाबा कहते हैं कि भगवान की प्रेरणा से ही वे सेवा में लगे हैं। कहते है कि 85 साल का हो गया है।

अपनी अंतिम इच्छा जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि निधन के बाद बगैर किसी कानूनी और धार्मिक अड़चन के उनके पार्थिव शरीर को गंगा में प्रवाहित कर दिया जाए। उनका यह भी कहना है कि धर्म के नाम पर नफरत नहीं फैलानी चाहिए क्योंकि सभी धर्म मानवता की सेवा और प्रेम का संदेश देता है।

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