एक मुसलमान शख्स ने बच्ची को खून देकर बचाई जान….

ये घटना बिहार के दरभंगा की है, जहां इस युवक ने बच्ची की जान बचाई। सबसे खास बात ये थी कि जिस शख्स ने बच्ची को खून दिया वो एक मुसलमान था और बच्ची को खून देने के लिए उसने अपना रोजा तोड़ दिया। अशफाक नाम के इस शख्स का कहना है कि किसी इंसान की जान बचाना रोजे से ज्यादा जरूरी है।

बिहार के दरभंगा में 2 दिन पहले जन्मी एक नवजात की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। डॉक्टरों ने परिवार वालों से बच्ची के लिए खून का इंतजाम करने को कहा।

लेकिन बच्ची का ब्लड ग्रुप ओ नेगेटिव था, जिस वजह से खून का इंतजाम नहीं हो पा रहा था। बच्ची के पिता ने सोशल मीडिया में खून की मांग की। इसी दौरान एक शख्स अस्पताल पहुंचा और अपना खून देकर बच्ची की जान बचाई।

रमजान के दौरान ये दूसरा मौका है जब किसी मुस्लिम शख्स ने किसी हिंदू की जान बचाई है। कुछ दिन पहले बिहार के ही गोपालगंज में एक मुस्लिम शख्स ने 8 साल के हिंदू बच्चे की जान बचाई थी।

दरअसल, दरभंगा में रहने वाले एसएसबी के जवान रमेश कुमार की पत्नी आरती ने दो दिन पहले बच्ची को जन्म दिया था। लेकिन बच्ची की तबीयत बिगड़ गई। उसे खून की जरूरत थी। ओ निगेटिव ब्लड ग्रुप होने की वजह से जब खून का इंतजाम नहीं हो पाया तो पिता ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर की। इसकी जानकारी अशफाक को मिली तब वे सीधा अस्पताल पहुंचे। रोजा होने की वजह से डॉक्टरों ने खून लेने से मना कर दिया, जिसके बाद अशफाक ने रोजा तोड़कर बच्ची को खून दिया।

अशफाक ने कहा कि मैंने एक बच्ची की जान बचाने के लिए अपना रोजा तोड़ा है। किसी इंसान की जान बचाना, रोजे से ज्यादा अहमियत रखता है। मैं अपना रोजा बाद में भी रख सकता हूं, लेकिन किसी इंसान की जान बाद में नहीं बचाई जा सकती। बता दें कि 24 मई को गोपालगंज में जावेद आलम नाम के शख्स ने 8 साल के बच्चे को रोजा तोड़कर खून दिया था।

 

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