जानें इस दिन नाग देवता को क्यों चढ़ाते हैं दूध : Nag Panchami Puja Myths And Importance

नागपंचमी का त्यौहार उत्तर भारत में श्रावण शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है। इस बार नाग पंचमी 15 अगस्त को मनाई जा रही है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने और उन्हें दूध चढ़ाने की परंपरा है। कई इलाकों में आज के दिन दंगल भी आयोजित किए जाते हैं। लेकिन हर किसी के मन में होगा कि नाग पंचमी पर नाग देवता को दूध चढ़ाने या सापों को दूध पिलाने के पीछे क्या कहानी है। तो आइए जानते हैं नाग पंचमी पर सांपों को दूध क्यों पिलाया जाता है।

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हिन्दू धर्म की कथाओं में कहा गया है नाग पंचमी के दिन नागों की पूजा करने और उन्हें दूध पिलाने से लक्ष्मी घर आती हैं। दूध पिलाने से नाग देवता खुश होते हैं और उनकी कृपासे घर से लक्ष्मी कभी बाहर नहीं जातीं। नाग देवता की पूजा करने से लोगों को सर्पदंश का भय भी नहीं रहता। हालांकि जंतु वैज्ञानिकों का मानना है कि सांपों को दूध नहीं पिलाना चाहिए क्योंकि उसकी शारीरिक बनावट ऐसी नहीं होती कि वह दूध को पचा पाए।

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सांपों की पूजा का दूसरा कारण और महत्वपूर्ण तर्क यह भी है कि भारत कृषि प्रधान देश है और सांपो चूहों आदि से खेतों की रक्षा करता है। सांप को क्षेत्रपाल नाम से भी जानते हें। शायद सांपों के इसी महत्व को देखते हुए लोगों इनकी पूजा करना शुरू किया हो। हमारे देश में जैसे कि नदियों और पेड़ों की पूजा करने  की परंपरा है वैसे ही सापों को भी पूजा की जाती है।

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धार्मिक मान्यता:
नागों की कहानी से जुड़े भविष्य पुराण में कहा गया है कि आठ प्रमुख नागों का नाम लेने वाले इंसान को किसी जीच का भय नहीं सताता। जैसा कि इस स्लोक में कहा गया है-

वासुकिः तक्षकश्चैव कालियो मणिभद्रकः।
ऐरावतो धृतराष्ट्रः कार्कोटकधनंजयौ ॥
एतेऽभयं प्रयच्छन्ति प्राणिनां प्राणजीविनाम् ॥
 (भविष्योत्तरपुराण – ३२-२-७)
अर्थ: वासुकि, तक्षक, कालिया, मणिभद्रक, ऐरावत, धृतराष्ट्र, कार्कोटक और धनंजय – ये प्राणियों को अभय प्रदान करते हैं।

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