नहीं बदला सिलेबस तो गणित फिर बनेगी दाखिलों में मुसीबत

बॉयज इंजीनियरिंग कॉलेज में एसीए के दाखिलों में गणित फिर फांस बन सकती है। दो साल से सेंटर फॉर ई-गवर्नेंस प्रवेश में रियायत दे रहा है। उसकी बीसीए अथवा बारहवीं में गणित की अनिवार्यता की शर्त बरकरार है। उधर महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय का कोर्स अपडेट नहीं हुआ है। सत्र 2018-19के पहले इसमें बदलाव नहीं हुआ तो विद्यार्थियों की परेशानी बढ़ेगी।

सेंटर फॉर ई-गवर्नेंस की आरएमकेट परीक्षा के जरिए बीसीए उत्तीर्ण विद्यार्थियों को मास्टर ऑफ कम्प्यूटर एप्लीकेशन (एमसीए) में प्रवेश मिलते रहे हैं। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने साल 2016 में प्रक्रिया में संशोधन किया। इसके तहत बीसीए अथवा बारहवीं कक्षा में विद्यार्थियों के लिए गणित विषय की अनिवार्यता लागू कर दी गई। ऐसे में इंजीनियरिंग कॉलेज की दिक्कतें बढ़ गई। विद्यार्थियों के दबाव और उच्च स्तरीय प्रयासों से पिछले साल सेंटर फॉर ई-गवर्नेंस ने प्रवेश में रियायत दी।

अपडेट नहीं हुआ विवि का कोर्स

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के बीसीए कोर्स में गणित विषय शामिल है। तत्कालीन कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी ने बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक बुलाकर गणित विषय शामिल करने के निर्देश दिए। इसके बावजूद डेढ़ साल से मामला आगे नहीं बढ़ा है। विश्वविद्यालय स्तर पर कोर्स अपडेट हेाना है।

कोर्स और दाखिलों पर तलवार

बीसीए अथवा बारहवी में गणित विषय की अनिवार्यता से इंजीनियरिंग कॉलेज की परेशानियां बरकरार हैं। यहां एमसीए प्रथम और द्वितीय वर्ष में 60-60 सीट हैं। सेंटर फॉर ई-गवर्नेंस की सख्ती को देखते हुए इस बार एमसीए के दाखिलों और कोर्स पर तलवार लटक सकती है। दो साल से रियायत देने वाला ई-गवर्नेंस इस बार किसी समझौते के मूड में नहीं है।

विद्यार्थियों को होगा नुकसान

बीसीए, बीएससी आईटी, बीएससी कम्प्यूटर साइंस कोर्स के अधिकांश विद्यार्थी उच्च अध्ययन के लिए एमसीए में प्रवेश लेते हैं। गणित की अनिवार्यता की शर्त उनके एमसीए में प्रवेश का सपना तोड़ सकती है। राज्य सरकार, तकनीकी शिक्षा विभाग, महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय इस मामले में चुप्पी साधे बैठे हैं।

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