भीमा कोरेगांव हिंसा केस में ताबड़तोड़ छापेमारी, नक्सल समर्थक होने के शक में 5 गिरफ्तार

पांच महीने में दूसरी बार मंगलवार को पुणे पुलिस ने देशभर के कथित नक्सल समर्थकों के घरों व कार्यालयों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। सूत्रों के मुताबिक भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में जांच के मद्देनजर छापे के बाद अब तक कवि वरवरा राव, अरुण पेरेरा, गौतम नवलखा, वेरनोन गोन्जाल्विस और सुधा भारद्वाज को गिरफ्तार किया गया है। सभी आरोपियों को सेक्शंस 153 A, 505(1) B,117,120 B,13,16,18,20,38,39,40 और UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम ऐक्ट) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

आपको बता दें कि भीमा-कोरेगांव में जनवरी महीने में हुई हिंसा में पांच लोगों की गिरफ्तारी के बाद चौंकानेवाला खुलासा हुआ था। पुणे पुलिस को एक आरोपी के घर से ऐसा पत्र मिला था, जिसमें राजीव गांधी की हत्या जैसी प्लानिंग का ही जिक्र किया गया था। इस पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने की बात भी कही गई थी।

सूत्रों ने बताया कि मंगलवार को देशभर के कई शहरों मुंबई, रांची, हैदराबाद, फरीदाबाद, दिल्ली और ठाणे में छापेमारी की गई। रांची में स्टेन स्वामी को गिरफ्तार नहीं किया गया है, केवल उनके घर की तलाशी ली गई। कार्यकर्ताओं के कई समर्थकों ने विभिन्न जगहों पर पुलिस छापे के दौरान प्रदर्शन किया। उधर, भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने पुणे के लिए ऐक्टिविस्ट गौतम नवलखा की ट्रांजिट रिमांड पर स्टे लगा दिया है। वह बुधवार को केस की सुनवाई होने तक हाउस अरेस्ट रहेंगे।

उधर, CPI(M) के नेता प्रकाश करात ने देशभर में हुई छापेमारी और गिरफ्तारी को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करार दिया है। उन्होंने गिरफ्तार लोगों को छोड़ने के साथ ही केस वापस लेने की मांग की। माकपा पोलित ब्यूरो की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भीमा कोरेगांव में दलितों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं के बाद से महाराष्ट्र पुलिस केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर दलित अधिकार कार्यकर्ताओं और वकीलों को निशाना बना रही है। पार्टी ने पीड़ितों के मुकदमे लड़ रहे वकीलों और इनकी मदद कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि निरोधक कानून की विभिन्न धाराओं के तहत इनके खिलाफ फर्जी मामले दर्ज किए जाने का आरोप लगाया।

इन छापों को 17 अप्रैल को की गई ऐसी ही कार्रवाई के आगे की कार्रवाई बताया गया है, जब पुणे पुलिस ने आधा दर्जन से ज्यादा दलित कार्यकर्ताओं और कबीर कला मंच से जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया था। इन कार्यकर्ताओं ने 31 दिसंबर 2017 को पुणे में यलगार परिषद का आयोजन किया था। अगले दिन एक जनवरी को कोरेगांव-भीमा में जातीय दंगे भड़क गए थे, जिसमें एक शख्स की मौत हो गई थी। इसके बाद प्रकाश आंबेडकर की अध्यक्षता वाले भारिप-बहुजन महासंघ द्वारा तीन जनवरी को महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया गया था।

करीब पांच महीने बाद पुणे पुलिस की टीमों ने करीब आधा दर्जन राज्यों में कई लोगों के घरों और कार्यालयों पर छापेमारी की। इन लोगों पर यलगार परिषद के साथ संबंध रखने और नक्सल समर्थक होने का संदेह है। पुलिस ने उनके पास से कंप्यूटर, लैपटॉप, सीडी, दस्तावेज और किताबें जब्त की हैं और दावा किया है कि यह सभी नक्सलियों के लिए शहरी थिंक टैंक के रूप में कार्य कर रहे थे। इनमें से कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं।

Facebook Comments