अब बीजेपी-आप पर बीएचयू के छात्रों से पूछे गए सवाल

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में राजनीति शास्त्र के पेपर में भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी के बारे में पूछे गए सवाल को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ दिन पहले ही केंद्र की मोदी सरकार के माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को प्रकांड अर्थशास्त्री कौटिल्य से जोड़कर पूछे गए प्रश्न से छात्र चकरा गए थे।

राजनीति शास्त्र विभाग के एमए-प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा में ‘भारतीय राजनीतिक प्रणाली: सैद्धांतिक और संरचनात्मक पहलू’ विषय के पेपर में छात्रों से भारतीय जनता पार्टी पर निबंध लिखने को कहा गया था। इसके लिए 15 अंक निर्धारित रहे। इसी तरह दिल्ली में शासन कर रही आम आदमी पार्टी के बारे में छात्रों को लिखने को कहा गया, लेकिन इसपर महज दो अंक थे। इन प्रश्नों के जरिए समकालीन राजनीति पर छात्रों के ज्ञान का परीक्षण किया गया। परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों के मुताबिक सवाल बहुत आसान रहे, पर सीधे के बजाए यह विश्लेषणात्मक होना चाहिए था। ये प्रश्न इन दिनों बीएचयू कैंपस में चर्चा का विषय है।

राजनीति शास्त्र विभाग के प्रफेसर कौशल किशोर मिश्र का कहना है कि सवाल पाठ्यक्रम में शामिल विषय भारतीय लोकतंत्र में दलों की स्थिति से संबंधित है। इसमें कुछ गलत नहीं और जानबूझकर भी नहीं है। किसी छात्र को भी इसपर आपत्ति नहीं थी।

इससे पहले प्राचीन और मध्य युगीन भारत में सामाजिक और राजनीतिक सोच विषय के प्रश्न पत्र में सवाल यह रहा कि चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल के आर्थिक सलाहकार कौटिल्य की नजरों में ‘जीएसटी’ का क्या मतलब था ? छात्रों को निबंध के रूप में इसकी व्याख्या करने को कहा गया था। 15 अंक जुटाने के लिए 2300 साल पुराने काल संदर्भ में पूछे गए सवाल पर छात्र सिवाए सिर पीटने के कुछ भी नहीं कर सके थे।

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