खुशखबरी ! अब टीबी का दो साल का इलाज नौ माह में

अब मल्टी ड्रग रजिस्टेंट (एमडीआर) टीबी के मरीजों को दो साल तक दवा खाने की जरूरत नहीं है। सिर्फ नौ महीने में इलाज पूरा होगा। यह मुमकिन हुआ है नई दवा बेडाकुलीन से। इस दवा को एमडीआर टीबी के इलाज में शामिल किया जा रहा है।
टीबी के मरीज तबीयत में सुधार के बाद इलाज बीच में ही छोड़ देते हैं। बार-बार इलाज छोड़ने से मरीज में टीबी दवा का रजिस्टेंट बन जाता है। नतीजतन टीबी की सामान्य दवा मरीज पर असर नहीं करती हैं। ऐसे में मरीज एमडीआर की जद में आ जाता है। इन मरीजों का इलाज कठिन होता है। दो साल इलाज चलता है। स्वास्थ्य विभाग में उप राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. ऋषि कुमार सक्सेना बताते हैं कि इलाज बीच में छोड़ने वालों की संख्या काफी है। मरीजों को राहत देने के लिए बेडाकुलीन को कोर्स  जोड़ा जा  रहा है।
जांच के बाद दी जाएगी दवा: डॉ. ऋषि कुमार सक्सेना ने बताया कि मरीज की सेहत की जांच के बाद ही बेडाकुलीन दवा दी जाएगी। उन्होंने बताया कि अभी आगरा में दवा लांच की गई है। इसके बाद दूसरे अधिक आबादी वाले जिलों में दवा शुरू की जाएगी। ताकि अधिक से अधिक मरीजों को फायदा पहुंचाया जा सकता है।
दिल के मरीज को न दें दवा

दिल की बीमारी से पीड़ित एमडीआर व एक्सडीआर टीबी के मरीजों को यह नई दवा नहीं देनी होगी। क्योंकि दवा के अपने दुष्प्रभाव हैं। जो दिल के मरीजों की सेहत के लिए घातक साबित हो सकते हं। उन्होंने बताया कि बेडाकुलीन यूएसए खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग से अप्रूवड है।
मुफ्त मिलेगी दवा

उप्र क्षय नियंत्रण टास्क फोर्स के चेयरमैन डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि दवा के दुरुपयोग रोकने की दिशा में अहम कदम उठाए जा रहे हैं। खासबात यह है कि बेडकुलीन दवा सिर्फ सरकारी अस्पतालों में मिलेगी। वह भी मुफ्त। प्राइवेट अस्पताल व मेडिकल स्टोर में दवा की बिक्री नहीं होगी।

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