जैविक खाद की जबरदस्त मांग,भूमि की सेहत रहेगी ठीक…

आज जैविक खेती का जमाना है, क्योंकि इससे भूमि की सेहत ठीक रहती है और स्वास्थ्यवर्धक फसल की प्राप्ति होती है। देश दुनिया में आज जैविक खाद की जबरदस्त मांग है। ग्रामीण युवा अगर काम की तलाश में हैं तो यूनिट लगाकर पैकिंग में जैविक खाद उपलब्ध करवा सकते हैं। इस खाद की मांग भी वर्तमान में अधिक है।

जम्मू में तैयार खाद कश्मीर में भी बड़े तौर पर बिकती है। जैविक खाद के लिए बहुत ज्यादा पैसा निवेश करने की जरूरत नहीं। जबकि गोबर घर से ही उपलब्ध हो सकता है। अगर आपके घर में पांच मवेशी हैं तो तीस वाई दस फुट का वर्मी कंपोस्ट यूनिट बनाया जा सकता है। इस साइज का पक्का सीमेंटड गड्ढा डेढ़ से दो फुट गहरा बनाया जाए। इसके अंदर 12 बेड बनाए जाएं। इसमें गोबर खाद डालें और उसमें केंचुए छोड़ दें। उसके बाद नियमित गोबर खाद गड्ढे में डालते रहना है। केचुएं गोबर खाद खाते हैं और जो वेस्ट वो निकालेंगे, वही जैविक खाद है। पांच मवेशी के नियमित गोबर डालने से 50 से 60 क्विंटल जैविक खाद प्राप्त होगा। इससे हर साल 35 से 40 हजार रुपये  की कमाई की जा सकती है। यह खाद अपने खेतों में इस्तेमाल की जा सकती है या पैकिंग कर बेची भी जा सकती है। क्योंकि प्रति किलो 7 रुपये में जैविक खाद बिक रही है।

अगर कोई बड़ा काम करने का इच्छुक हो तो किया जा सकता है। बस गोबर का बंदोबस्त करना होगा। गांव में अपने घर के आसपास के लोगों से बातचीत कर उनके गोबर लिया जा सकता है या ग्रुप बनाकर भी काम किया जा सकता है। जैविक खाद की यूनिट लगाकर ग्रामीण युवा बनें सबल पांच मवेशियों का नियमित गोबर डालने से 50 से 60 क्विंटल जैविक खाद प्राप्त होगा

इन दिनों नींबू जातीय (स्ट्रिस) पेड़ों पर फूल लग रहे हैं। ऐसा ही आम के पेड़ पर है, जो बौर से भरा हुआ है। ऐसे समय में कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिक डॉ. आकाश ने निम्नलिखित सलाह दी है:’

फूलों के पेड़ों को हिलाएं डुलाएं नहीं। फूलों पर किसी तरह की दवा का छिड़काव न करें। ऐसा करने पर मधुमक्खी से फूल का पॉलिनेशन नहीं होगा और फल नहीं बन पाएगा। ’ अगर कोई फूल खराब हो रहा हो या बीमारी लगती दिख रही हो तो वह टहनी तोड़कर जमीन में दवा दें। दवा का छिड़काव न करें। किसी तरह की खाद पौधे को नहीं दी जानी चाहिए। फ्रूट सेट होने के बाद भी खाद दी जा सकती है। चूंकि फ्रूट सेट हो रहा है, इसलिए जमीन में उचित नमी चाहिए। इसके लिए समय समय पर पानी देते रहना चाहिए।

भूमि की सेहत ठीक रहने के साथ फसलें भी स्वास्थ्यवर्धक देश दुनिया में आज जैविक खाद की जबरदस्त मांग स्वरोजगार पशुपालन इन दिनों मौसम में शुष्क है और दुधारू जानवरों के लिए विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। दूध देने वाले मवेशियों के थन शुष्क वातावरण होने के कारण फट सकते हैं। इसलिए हर बार दूध दोहने के बाद थनों को घी या मक्खन लगाएं। इससे पहले गर्म गुनगुने पानी से थनों को धोएं।

बादल रहेंगे मगर बढ़ेगा तापमान 

अगले चार पांच दिन में मौसम उतार चढ़ाव वाला है। धूप रहेगी व आसमान पर बादल नजर आएंगे। इस बीच, हल्की बारिश के भी आसार हैं। कुल मिलाकर मौसम साफ रहेगा। तापमान बढ़कर 29 से 31 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। न्यूनतम तापमान 15 से 16 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। शेर-ए-कश्मीरयूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के सीनियर वैज्ञानिक डॉ. महेंद्र सिंह का कहना है कि मौसम को देखते हुए किसान अपने कामकाज करें ।

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