प्रेग्नेंसी में बढ़ेगा यह हार्मोंन तो बच्चा पैदा होगा विकलांग!

ऑटिज्म एक ऐसी बीमारी हैं जिसमें बच्चे का मानसिक विकास सही से नहीं हो पाता यह एक तरह की विकलांगता है। ऐसे बच्चे को ताउम्र खास देखभाल की जरूरत पड़ती है क्योंकि यह बचपन से शुरू हो कर जीवन के अंत तक रहता है।

 

PCOS ग्रस्त महिला का बच्चा ऑटिज्म का शिकार
हालांकि इस बीमारी के बारे में अभी सटीक वजहें नहीं जांची गई लेकिन शोधों के अनुसार, आनुवांशिक और पर्यावरण-विकास में अंतर के लिए हो सकता है। लेकिन नई स्टडी के रिपोर्ट के मुताबिक, PCOS यानि पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम से पीड़ित महिलाओं के पैदा होने वाले बच्चों में ऑटिज्म विकसित होने की आशंका अधिक  रहती है।

 

टेस्टोस्टेरोन हार्मोंन हैं इसके लिए जिम्मेदार 
स्टडी के अनुसार, पीसीओएस उच्च टेस्टोस्टेरोन की वजह से होने वाला एक विकार है, जिसके परिणामस्वरूप समय से पहले युवावस्था, अनियमित माहवारी और शरीर पर अतिरिक्त बाल होने लगते हैं।

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बता दें कि यह स्टडी ‘ट्रांसलेशनल साइक्रियाट्री’ में प्रकाशित की गई है जिसमें पीसीओएस से पीड़ित लगभग 8,588 महिलाओं के आंकड़ों की जांच की थी जबकि पिछली स्टडी से पता चला था कि ऑटिस्टिक बच्चों में टेस्टोस्टेरोन समेत ‘सेक्स स्टीरॉयड’ हार्मोन के स्तर बढ़ जाते हैं, जो बच्चे के शरीर और मस्तिष्क को समय से पहले ही युवावस्था की ओर जाने लगते हैं। हार्मोन के बढ़ते स्तर पर बहस करते हुए शोधकर्ताओं ने पाया कि इसका एक कारण जन्म देने वाली मां का विकार हो सकता है।

 

रिपोर्ट के अनुसार, अगर मां के शरीर में सामान्य से अधिक टेस्टोस्टेरोन हार्मोन होता है, जैसा कि पीसीओएस वाली महिलाओं के मामले में देखा जाता है। वहीं, कुछ हार्मोन गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा को पार कर जाते हैं और यह हार्मोंन भ्रूण में अधिक संपर्क कर जाते हैं जिससे बच्चे के मस्तिष्क का विकास बदल जाता है।

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ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज से एड्रियाना चेरस्कोव बताती हैं, यह नतीजे इस सिद्धांत को और मजबूत कर देते हैं जिसमें यह कहा जाता है ऑटिज्म केवल जीनों के कारण नहीं होता बल्कि जन्म से पहले ही सेक्स हार्मोन जैसे  टेस्टोस्टेरोन के स्तर के बढ़ने के कारण भी यह हो सकता है।

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