Health : युवाओं को धर दबोचतीं हैं ये पांच बीमारियां

बीमारियां किसी की सगी नहीं होती। अनुकूल स्थितियां हों तो वो किसी को भी दबोच लेती हैं। फिर भी इतिहास, भूगोल और आंकड़ों के आधार पर कहा जा सकता है कि अलग अलग उम्र समूह के लोगों को अलग अलग किस्म की बीमारियां सताती हैं। जैसे छोटे बच्चो को डायरिया तो बूढों को गठिया। इसी तरह कुछ खास बीमारियां युवाओं को भी दबोचने में माहिर होती हैं। बावजूद इसके ज्यादातर लोग इस गलतफहमी के शिकार होते हैं कि युवाओं से बीमारियां दूर रहती हैं। युवाओं को खासतौर पर निशाना बनाने वाली कुछ प्रमुख बीमारियां ये हैं। इसलिए आज हम आपको युवाओं को होने वाली खास ऐसी पांच बीमारियों के बारे में बता रहे हैं जिनको अगर नजरअंदाज करेगें, तो वो लाइलाज बनने से पहले उन्हें बढ़ने से रोक सकें और फिट रह सकें।

जानलेवा सिरदर्द-

दुनिया में कोई ऐसा इंसान नहीं है जिसे सिरदर्द न होता हो फिर चाहे वो जिस उम्र समूह से ताल्लुक रखता हो। फिर भी ये सबसे ज्यादा युवाओं को अपना शिकार बनाता है। 65 प्रतिशत कामकाजी युवाओं को हफ्ते में कम से कम एक बार सिरदर्द जरूर होता है। लेकिन युवा लोग सिरदर्द होते ही पेनकिलर खा लेते हैं और तत्काल इससे छुट्टी पा लेते हैं। ऐसा लगता है जैसे वह सिरदर्द से निपटने के लिए तैयार ही बैठे हों।

लेकिन डाक्टरों का कहना है कि हर बार सिरदर्द में पेनकिलर खाना अक्लमंदी नहीं है। हो सकता है बार-बार होने वाला सिरदर्द काम के दबाव या लाइफस्टाइल की वजह से न हो बल्कि यह माइग्रेन का लक्षण हो। इसलिए लगातार सिरदर्द हो तो सावधान रहें और तुरंत इसकी जांच कराएं। क्योंकि कई बार लगातार अनदेखी करने से बे्रन ट्यूमर बन जाने या ब्रेन हैमरेज तक का खतरा पैदा हो जाता है।

अगर सिर के किसी एक हिस्से में लगातार दर्द हो और आंखों में पानी आता हो तो पेनकिलर खाकर इसकी अनदेखी न करें। वैसे यह सीख सिर्फ युवाओं के लिए ही नहीं है। हर किसी को इस बारे में यही रवैय्या अपनाना चाहिए।

पिछले दो दशकों में ग्लोबलाइजेशन के चलते जिंदगी में जो रफ्तार और व्यस्तता बढ़ी है, उसके चलते एक दर्जन से ज्यादा जीवनशैली रोग लोगों की स्वास्थ्य समस्या के लिए बड़ा सिरदर्द बन गये हैं जिनमें से ज्यादातर के शुरुआती लक्षण सिरदर्द के रूप में ही सामने आते हैं। इसलिए सिरदर्द से खासतौर पर सावधान रहें। युवा भी और गैर युवा भी।

सीढियां चढ़ते हुए हांफना-

दिल्ली की मेट्रो स्टेशनों में मौजूद लिफ्ट के बाहर बड़े बड़े अक्षरों में लिखा होता है केवल बूढों और विकलांगों के लिए। लेकिन लिफ्ट में लगे कैमरों के डाटा देखिये तो सबसे ज्यादा लिफ्ट का इस्तेमाल युवा करते हैं और इनमें वो दिखने में हट्टे कट्टे युवा भी मौजूद होते हैं जो बाहर से सेहतमंद दिखते हैं लेकिन सीढ़ियों से मेट्रो स्टेशन चढ़ने के नाम पर कांप जाते हैं।

जी हां, आज तमाम ऐसे युवा हैं जो चार मंजिल सीढ़ियां से चढ़ते हुए हांफ जाते हैं। अगर आपके साथ ऐसा है तो यह आपके स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी है। तुरंत सचेत हो जायें, डाक्टर को दिखायें और स्वस्थ रहने के लिए उपाय करें।

जरा सी सफोकेशन में अगर आपको ऐसा लगने लगता है कि आप फड़फड़ा रहे हैं तो इसका मतलब यह है कि आपके फेफड़ों में किसी किस्म की रूकावट है और इस रूकावट की वजहें कई हो सकती हैं- मोटापा, ट्यूमर या एयर बबल। ये सभी वजहें खतरनाक हैं इसलिए जब भी सांस फूलने की समस्या ऐसी स्थिति में महसूस हो जब नहीं होनी चाहिए तो तुरंत चैकअप कराएं।

बिना वजह,वजन घटना-

गली गली में वजन घटाने वाले क्लीनिकों के विज्ञापन देखकर खुश होने की कतई जरुरत नहीं है अगर आपका वेट अचानक खुद ब खुद 5 किलो या इससे ज्यादा घट गया है। माना कि यह जीरो साइज और अंडरवेट का दौर है लेकिन अगर आपने इसके लिए कोई कोशिश नहीं की, अगर आप डाइटिंग पर भी नहीं रहे या रहीं फिर भी अचानक आपका वजन कम होने लगता है तो यह आपके छरहरे होने की निशानी नहीं है बल्कि यह किसी गंभीर रोग का लक्षण है।

यह डायबिटीज, डिप्रेशन या थॉयरायड डिसऑर्डर की वजह से हो सकता है या फिर इससे भी गंभीर एड्स का लक्षण हो सकता है। इसलिए इसकी अनदेखी करना बेहद खतरनाक है। जैसे ही बिना किसी प्रयास के आपका वजन घटने लगे तुरंत अपने फैमिली डॉक्टर को इस समस्या से अवगत कराएं और नजर रखें।

अगर किसी भी कीमत में यह जारी रहता है तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें वरना ऐसा भी हो सकता है कि चुपके से आप उस मोड़ में आ पहुंचे हों जहां से जिंदगी में वापसी नहीं होती।

लगातार खांसी रहना

खांसी कभी स्टाइल स्टेटमेंट नहीं होती जैसे कि कुछ लोग दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बारे में मजाक में कहा करते थे। खांसी से आमतौर पर युवा नफरत करते हैं। शायद इसलिए भी क्योंकि यह बीमार न होने के बावजूद आपको बीमार दिखाती है।

लेकिन यह भी बात सही है कि खांसी को युवा बहुत गंभीरता से नहीं लेते बल्कि देखा यह गया है कि जैसे ही उन्हें लगता है कि वह खांसी की गिरफ्त में हैं तुरंत केमिस्ट की दुकान जाते हैं और उससे कोई भी खांसी की दवा ले लेते हैं। यह खतरनाक है।

बहुत मामूली सी समस्या दिखने वाली खांसी जानलेवा हो सकती है। भले लगे यह जानलेवा नहीं होती और तब तो बिल्कुल ही कोई जोखिम नहीं उठाना चाहिए जब खांसी बार बार आ रही हो। क्योंकि बार बार खांसी आने का मतलब कुछ भी हो सकता है। यह शरीर में किसी गंभीर संक्रमण का द्योतक हो सकती है।

एक सीधी सी बात समझिये कि बार-बार खांसी आने का मतलब है, हवा के आने जाने के रास्ते में कुछ रूकावट है। यह अस्थमा या लंग कैंसर का शुरूआती लक्षण भी हो सकता है। यह ट्यूबर क्लोसिस का भी लक्षण हो सकती है। इसलिए इसकी अनदेखी करना कतई उचित नहीं है।

यूरिन में जलन-

खासकर युवतियों को होने वाली यह बीमारी है। डॉक्टरों के मुताबिक अगर जलन या लगातार लालिमा बनी रहती है तो यह खतरनाक हो सकती है। यह महिलाओं के लिए यूरिन कैंसर का लक्षण हो सकता है या ब्लैडर में इंफेक्शन की सूचना।ऐसे मामले में जरा भी लापरवाही बरतना भारी पड़ सकता है।

अगर आप स्मोक करती हैं तो यह तो खतरा तीन गुना ज्यादा बढ़ जाता है। इसलिए इसके प्रति लापरवाही बरतना ठीक नहीं। एक और बात ध्यान रखने की है। ऐसी समस्या में सीधे केमिस्ट से दवा लाकर खा लेना या दादी मां के घरेलू नुस्खों पर यकीन करना भी सही नहीं है।

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