क्या आपको पता है आखिर क्यों रखते हैं पंडित और ब्राह्मण सिर पर चोटी

हम सभी ने अक्सर ही पुराने समय को दिखाने वालें टीवी शोज में पंडितों को देखा है जिनके सिर पर चोटी होती थी. कभी आपने सोचा है कि उस चोटी का मतलब क्या है और उसे सर पर क्यों रखा जाता था. अब अगर आपने सोचा है और आपको जवाब नहीं मिला तो आइए हम आपको बताते हैं कि आखिर क्यों रखते थे पंडित और ब्राह्मण सिर पर चोटी. दरअसल कहा जाता है कि पहले के समय में यानी वैदिक काल में सभी लोगों को उनके काम और उनकी जाति के अनुसार अलग-अलग भागो में बांटा जाता था.

ऐसे में जो पंडित होते थे उन्हें चोटी रखने की सलाह दी जाति थी ताकि उनकी पहचान हो सके. ऐसे में यह भी कहा जाता था कि मस्तिष्क के अंदर जहाँ बालों का केंद्र होता है वहीँ पर साड़ी नाड़ियों और संधियों का मिलना तय होता है ऐसे में वैदिक काल में उस जगह को अधिपतिमर्म कहा जाता था.

कहते है कि अगर उस जगह पर किसी को चोट लगे तो उसकी मौत हो जाती है. कहते है जब बच्चे जन्म लेते हैं तो उनका मुंडन संस्कार किया जाता था जो पहले के समय में एक बार नहीं बल्कि दो से तीन बार होता था. उस समय में कपाल केंद्र में चोटी रखी जाती थी. जब भी कोई व्यक्ति उस समय में यज्ञोपवीत धारण करता था तो वह केंद्र में चोटी भी रखता था और जहाँ चोटी रखी जाती थी उसे सहस्त्रार कहा जाता.  ऐसा माना जाता है कि उस स्थान पर आत्मा रहती है और इसी वजह से चोटी में गठान बाँध जाती थी.

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