एक बार फिर PNB की मुंबई ब्रांच में बैंक कर्मियों की मिलीभगत से हुआ घोटाला…

बताया जा रहा है कि इस नए घोटाले की एफआइआर 9 मार्च को दर्ज की गई है। इसके अनुसार, इस घोटाले को चंदेरी पेपर एंड एलाइड प्रोडक्ट्स नाम की कंपनी द्वारा अंजाम दिया गया। आरोप है कि संबंधित कंपनी को भी कर्ज देते वक्त नियमों का पालन नहीं किया गया, जैसा की नीरव मोदी के केस में भी हुआ था।

पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में इस लेटर का ही इस्तेमाल किया गया है। ज्वैलरी डिजायनर नीरव मोदी ने अपनी फर्म के आधार पर पंजाब नेशनल बैंक से ये फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग हासिल किये। फर्जी इसलिए क्योंकि न तो इसे बैंक के सेंट्रलाइज्ड चैनल से दिया गया और न ही जरूरी मार्जिन मनी नहीं थी। जारी होने के बाद इन LoUs की जानकारी स्विफ्ट कोड मैसेजिंग के जरिए सभी जगह भेज दी गई। इन LoU को नीरव मोदी ने विदेशों में अलग अलग सरकारी और निजी बैंक की शाखाओं से भुना लिया। भुनाई हुई राशि करीब 11000 करोड़ रुपए की थी।

नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के घोटाले की आंच से तप रही पंजाब नेशनल बैंक में एक और घोटाले का पता चला रहा है। हालांकि इस बार जिस घोटाले का खुलासा हुआ है उसकी रकम पिछली बार के मुकाबले कम है। पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, ये घोटाला भी मुंबई की पीएनबी ब्रांच में हुआ है। एफआइआर के मुताबिक नया घोटाला 9.09 करोड़ रुपये का है।

करीब 13,600 करोड़ का पीएनबी घोटाला

पीएनबी घोटाले की जांच जैसे जैसे आगे बढ़ रही है, घोटाले से जुड़ी एक-एक परतें खुलती जा रही हैं। घोटाले के उजागर होते वक्त कहा जा रहा था कि यह घोटाला 11700 करोड़ रुपये का है। इसके बाद यह बढ़कर 12700 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। दो दिन पहले ही घोटाले की राशि में और 900 करोड़ रुपए का इजाफा हो गया है और अब यह करीब 13600 करोड़ रुपये का घोटाला बताया जा रहा है। सीबीआई ने इससे पहले दावा किया था कि जनवरी में पीएनबी की ओर से मिली शिकायत के बाद शुरू की गई जांच में पाया गया था कि बैंक अधिकारियों की ओर से नीरव मोदी की कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए फर्जी एलओयू जारी किये गये थे।

लेटर ऑफ अंडरटेकिंग किसी अंतरराष्ट्रीय बैंक या किसी भारतीय बैंक की अंतरराष्ट्रीय शाखा की ओर से जारी किया जाता है। इस लेटर के आधार पर बैंक, कंपनियों को 90 से 180 दिनों तक के शॉर्ट टर्म लोन मुहैया कराते हैं। इस लेटर के आधार पर कोई भी कंपनी दुनिया के किसी भी हिस्से में राशि को निकाल सकती है। इसका इस्तेमाल ज्यादातर आयात करने वाली कंपनियां विदेशों में भुगतान के लिए करती हैं। लेटर ऑफ अंडरटेकिंग किसी भी कंपनी को लेटर ऑफ कम्फर्ट के आधार पर दिया जाता है। लेटर ऑफ कम्फर्ट कंपनी के स्थानीय बैंक की ओर से जारी किया जाता है।

 

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