10 हजार मीटर में जीता ब्रॉन्ज, पिता की मौत के बाद पड़ोसी ने पाला था गोविंदन को

एशियन गेम्स की 10 हजार मीटर रेस में ब्रॉन्ज जीतने वाले गोविंदन लक्षमण ने लंबे संघर्ष के बाद सफलता हासिल की है। 28 साल के गोविंदन अभी 2017 में हुई एशियन चैम्पियनशिप की 10 हजार मीटर रेस में गोल्ड जीतकर चर्चा में आए थे। गोविंदन ने न सिर्फ 10 हजार मीटर बल्कि पांच हजार मीटर में भी गोल्ड जीता था। लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि सफलता के इस मुकाम तक पहुंचने के लिए गोविंदन ने कई मुसीबतों का सामना किया है।

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दरअसल गोविंदन जब छह साल का था तो उनके पिता की कार हादसे में मौत हो गई थी। उनकी मां घरों में कामकाज कर उसका पेट पालती थी। ऐसे समय में गोविंदन के पड़ोसी एस. लोगानॉथन ने उसकी परवरिश की जिम्मेदारी उठाई।  लोगानॉथन ने न सिर्फ गोविंदन को पढ़ाया बल्कि उसको खेलों में भी उत्साहित किया।

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स्कूल से नैशनल स्तर तक गोविंदन ने कई रिकॉर्ड तोड़े। 2015 में उन्होंने पहली बार वुहान एशियन चैम्पियनशिप की 10 हजार मीटर रेस में हिस्सा लिया था। इसमें उन्होंने सिल्वर तो पांच हजार मीटर में ब्रॉन्ज मैडल जीता था। गोविंदन भारत के तीसरे दौडाक है जिन्होंने एशियन चैम्पियनशिप में गोल्ड जीता है। लंदन वल्र्ड चैम्पियनशिप में उन्होंने रिकॉर्ड 13.35.69 मिनट में दौड़ पूरी की थी।

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