मूरत में दिखेगी कवि नीरज की सूरत…

DJHâ¢Õ¢çŠæÌ æÕÚ Ñ ¥Õ ×êÚÌ ×ð´ Öè Îðç¹° ×ãæ·¤çß ÙèÚÁ ·¤è âêÚÌ ------------------ ¥Üè»É¸ Ñ ¥ÂÙð SÅUð‘Øê ·¤ô ×ôÕæ§Ü ȤôÙ ÂÚU Îð¹Ìð ×ãUæ·¤çß ÇUæò. »ôÂæÜÎæâ ÙèÚUÁÐ

दुनियाभर में अपने गीतों से धूम मचाने वाले महाकवि गोपालदास नीरज के प्रशंसकों के लिए बड़ी खुशखबरी यह है कि अब उनका स्टेच्यू भी बन गया है। अब लोग पत्थर की मूरत में से उनकी सीरत का भी अहसास कर सकेंगे। बुंदेलखंड की माटी के एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रणय ने 26 दिन के अथक परिश्रम के बाद इसे बनाया है। उन्होंने हास्य के महारथी काका हाथरसी समेत 160 साहित्यकारों के स्टेच्यू बनाने की ठानी है। 48 के बना भी चुके हैं। वह इन्हें पैतृक स्थान चित्रकूट में लगाएंगे।

स्टेच्यू देख नीरज बोले-ऐसा पहली बार देखा 

 

अपना स्टेच्यू देखकर भावुक हुए महाकवि नीरज बोले, यूं खुद को पहली बार देखा है। यह सौभाग्य ही है कि मेरे स्टेच्यू को धार्मिक स्थल चित्रकूट में लगाया जाएगा। पर, यह काम तो सरकार को करना चाहिए। कहा, राजनीति समाज को तोड़ती है, लेकिन साहित्य समाज को जोड़ता है। नेताओं के बहुत स्टेच्यू लग गए। अब साहित्यकारों के ही लगने चाहिए। इसके लिए उन्होंने डॉ. प्रणय का फोन पर आभार भी जताया।

एक अनूठा शिल्पलोक रचा

हिंदी पढ़ाने और कहानियों से अपनी पहचान बनाने वाले प्रो. प्रणय ने उम्र के ढलान पर कन्नी उठाई तो एक अनूठा शिल्पलोक रच डाला। वह मूलरूप से चित्रकूट के हैं। पिछले ही साल रीवा के सुदर्शन महाविद्यालय से सेवानिवृत्त हुए हैं। महाकवि गोपालदास नीरज का स्टेच्यू पिछले हफ्ते ही पूरा किया है। इसके पहले मीराबाई, नागार्जुन, सूरदास, तुलसीदास समेत 48 चर्चित साहित्यकारों के स्टेच्यू बना चुके हैं। नीरज का स्टेच्यू बनाने से पूर्व वह अलीगढ़ आए थे। नीरज का फोटो खींचा और उसी को जीवंत कर दिया।डॉ. प्रणय के मुताबिक मूर्तिकला का शौक बचपन से था, लेकिन नौकरी करते हुए इसे पर्याप्त समय नहीं दे पाते थे। सेवानिवृत्ति के बाद भरपूर समय दे रहे हैं। ङ्क्षहदी साहित्यकारों के स्टेच्यू सालभर पहले बनाने शुरू किए थे। कुछ स्टेच्यू चित्रकूट स्थित घर पर हैं तो कुछ रीवा में।प्रो. प्रणव की योजना डेढ़ साल में सभी 160 स्टेच्यू बनाने की है। फिर, चित्रकूट में हिंदी भवन बनाएंगे, जिसमें इन्हें स्थापित किया जाएगा। अभी प्रोफेसर रीवा में ही रहते हैं।

Facebook Comments