क्या प्रेगनेंसी के दौरान पपीता खाने से बच्चा गिर जाता है?

अनु मां बनने वाली थी. उसका पांचवा महीना चल रहा था. डॉक्टर ने उसे ख़ूब हरी सब्जियां और फल खाने की सलाह दी थी. एक दिन वो किचन में फल खाने गई. फ्रिज खोला तो सामने पपीता रखा हुआ था. उसने दो फांकें काटीं और मुंह में रख लीं. इतनी देर में उसकी सास किचन में आ गयीं. उसे पपीता खाते देख चीख पड़ीं. पपीता निधि के हाथ से लिया और दूर फेंक दिया. निधि घबरा गई. उसे समझ में नहीं आया कि उसने ऐसा किया क्या.

उसकी सास बोलीं. “अरे, पपीता क्यों खा रही हो? तुम्हें पता नहीं पपीता खाने से बच्चा गिर सकता है!”

ऐसा सिर्फ़ निशा कि सास को नहीं लगता. बहुत लोगों का मानना है कि प्प्रेग्नेंसी के दौरान पपीता नहीं खाना चाहिए. उससे बच्चा गिरने का डर होता है. मतलब मिसकैरिज हो सकता है.

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पर क्या वाकई ऐसा होता है? इस बात में कितनी सच्चाई है, ये जानने के लिए हमने दो स्त्री रोग विशेषज्ञ से बात की. डॉक्टर लवलीना नादिर, जो फ़ोर्टिस हॉस्पिटल, दिल्ली में हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट हैं. और उर्वशी प्रसाद झा. ये अपोलो हॉस्पिटल में डॉक्टर हैं.

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जब यही सवाल हमने इन दोनों से पूछा तो हमे अलग ही बात पता चली.

देखिए. काफ़ी समय पहले एक रिसर्च हुई थी. उसमें पता चला था कि पपीते में एक एंजाइम होती है. अब एंजाइम का मतलब क्या हुआ? एंजाइम का मतलब हुआ प्रोटीन के छोटे-छोटे मॉलिक्यूल. इनके शरीर में जाने से कुछ केमिकल रिएक्शन होता है. केमिकल रिएक्शन का ये मतलब नहीं हुआ कि ये हमेशा बुरा ही होता है. खैर. जो एंजाइम पपीते में होता है उसका नाम है पेपेन.

बहुत लोगों का मानना है कि प्रेगनेंसी के दौरान पपीता नहीं खाना चाहिए. उससे बच्चा गिरने का डर होता है. फ़ोटो कर्टसी: Pixabayबहुत लोगों का मानना है कि प्रेगनेंसी के दौरान पपीता नहीं खाना चाहिए. उससे बच्चा गिरने का डर होता है. फ़ोटो कर्टसी: Pixabay

रिसर्च के समय ये माना गया था कि पेपेन प्रेगनेंट औरतों के लिए नुकसानदेह होता है. इसे खाने से बच्चा गिर सकता है. और औरत जल्दी लेबर में भी जा सकती है.

पर जैसे-जैसे समय बदला, साइंस ने तरक्की की. इस बात पर फिर रिसर्च हुई. तब पता चला कि पेपेन बेचारा खामखा यूं ही बदनाम था. असली मुजरिम तो कोई और ही था. पपीता में पेपेन के साथ-साथ एक चीज़ और होती है. उसका नाम है लाटेक्स. ये उन पपीतों में होता है जो पके नहीं होते. यानी कच्चे.

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लाटेक्स का एक नुकसान है. उसकी वजह से प्रेगनेंट औरतों में कॉन्ट्रैक्शन शुरू हो जाते हैं. यानी बच्चा पैदा होते समय जो खिंचाव और दर्द महसूस होता है. लेटेक्स की वजह से ये वक़्त से पहले ही शुरू हो जाता है. बच्चा गर्भ में पूरी तरह से बना नहीं होता. वो सही समय नहीं होता है उसके बाहर आने का. साथ ही गर्भ के अंदर की जो परत है, वो भी सिकुड़ने लगती है.

इस वजह से गर्भपात होना का ख़तरा काफ़ी बढ़ जाता है. पर एक बात ध्यान रहे. जिस वजह से ये सब कुछ होता है वो है लाटेक्स. और फिर याद दिला दें. ये केवल कच्चे पपीते में पाया जाता है. पके हुए पपीते में नहीं. इसलिए प्रेगनेंसी के दौरान पके पपीते खाने में कोई नुकसान नहीं है. उससे गर्भपात नहीं होगा.

लेटेक्स का एक नुक्सान है. उसकी वजह से प्रेगनंट औरतों में कौनट्रकशन शुरू हो जाते हैं. फ़ोटो कर्टसी: Pixabayलेटेक्स का एक नुक्सान है. उसकी वजह से प्रेगनंट औरतों में कौनट्रकशन शुरू हो जाते हैं. फ़ोटो कर्टसी: Pixabay

याद है हमने आपको बताया था कि पपीतों में पेपेन एंजाइम होता है. वही बेचारी चीज़ जो गलत ही बदनाम हुई. पेपेन तो उल्टा सेहत के लिए अच्छा होता है. अव्वल तो वो हाज़मे में मदद करता है. दूसरा कब्ज़ होने से बचाता है.

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पर एक बात का ध्यान रहे. कोई भी चीज़ हो, सिर्फ़ हद में ही फ़ायदा देती है. इसलिए पपीता हो या कुछ और, उसे हौके से मत खाइएगा. पर अगर आप प्रेगनेंसी के दौरान पका हुआ पपीता खा लेती हैं, तो घबराइए मत. और हां, अगर गर्भ अनचाहा है तो पपीते जैसी घरेलू नुस्खों पर भरोसा करने की जगह डॉक्टर से बात करें.

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