पेट्रोल-डीजल पर 2 से 4 रुपए प्रति लीटर की कटौती की जा सकती है….

तेल कंपनियां भले ही दाम घटाने के लिए तैयार नहीं हों। लेकिन, सरकार एक्साइज ड्यूटी में कटौती करके लोगों को राहत दे सकती है। सूत्रों से मुताबिक, वित्त मंत्रालय एक्साइज ड्यूटी में कटौती के लिए तैयार है। हालांकि, अंतिम फैसला प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को लेना है। उम्मीद है पेट्रोल-डीजल पर 2 से 4 रुपए प्रति लीटर की कटौती की जा सकती है।

दिल्ली में पेट्रोल 77 रुपए के पार :
पेट्रोल-डीजल अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। दिल्ली में आज (बुधवार) को पेट्रोल पर 30 पैसे की बढ़ोतरी की गई है। इसके दाम 77।17 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गए हैं। वहीं, डीजल पर 26 पैसे बढ़ाए गए हैं। इसके दाम 68।34 रुपए प्रति लीटर पहुंच गए हैं। वहीं, मुंबई में पेट्रोल 29 पैसे महंगा होकर 84।99 रुपए प्रति लीटर हो गया है। मुंबई में डीजल की बात करें तो 28 पैसे महंगा होकर 72।75 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है।

आज हो सकती है तेल कंपनियों से बैठक :
पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की तेल कंपनियों के साथ आज बैठक हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार जानना चाहती है कि तेल कंपनियों के पास कितना स्टॉक है। ऐसे बताया जा रहा है कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की तीनों कंपनियां, IOC, HPCL और BPCL से तेल की कीमतों को होल्ड करने के लिए कहे। हालांकि, इससे तेल कंपनियों की जेब पर बोझ बढ़ेगा।

आज हो सकता है फैसला :
वित्त मंत्रालय ने पीएमओ को पेट्रोल-डीजल की कीमतों से जुड़ी सारी जानकारी मुहैया करा दी है। पिछले 10 दिनों में जिस तरह पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ी हैं। उससे एक्साइज ड्यूटी में कटौती की मांग बढ़ गई है। पेट्रोलियम मंत्री भी इस ओर इशारा दे चुके हैं कि सरकार जल्द ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों को कम करने के लिए कोई रास्ता निकालेगी। चर्चा यह भी है कि सरकार डीलर्स से भी अपनी कमीशन में कटौती को कह सकती है। उम्मीद है कि आज कोई फैसला आए।

एक बार घटाई गई एक्साइज ड्यूटी :
नवंबर 2014 में कच्चे तेल की कीमतें काफी कम थीं, पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी स्थिर थीं। बावजूद इसके सरकार ने 2016 तक 9 बार एक्साइज ड्यूटी में बढ़ाई थी। हालांकि, उसके बाद जून 2016 में पेट्रोल-डीजल की कीमतें रोजाना तय होने लगीं। हालांकि, उसके बाद केवल एक बार बीते साल अक्टूबर में सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती की थी। डीलरों के कमीशन को लेकर भी बात चल रही है।

560 अरब का बोझ पड़ेगा :
एक्साइज ड्यूटी में 1 रुपए की कटौती करने पर सरकार को करीब 140 अरब रुपए का बोझ उठाना पड़ता है। इसी तरह से इसमें 2 रुपए की कटौती पर 280 अरब रुपए का घाटा उठाना पड़ेगा। अगर 4 रुपए तक एक्साइज ड्यूटी में कटौती की जाती है तो सरकार के वित्तीय कोष पर 560 रुपए का बोझ पड़ सकता है।

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