ज्येष्ठ महीने में आने वाली पूर्णिमा को ज्येष्ठ पूर्णिमा या वट सावित्री भी कहा जाता है….

यह 29 मई को 7.49 बजे तक रहेगी। ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और भगवान शंकर व भगवान विष्णु की पूजा करती हैं। ज्येष्ठ महीने में आने वाली पूर्णिमा को ज्येष्ठ पूर्णिमा या वट सावित्री भी कहा जाता है। इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर अखंड सुहाग और सौभाग्य की कामना करती हैं।

भारत के कुछ राज्यों जैसे कि गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के राज्यों में ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ही वट सावित्री का त्योहार मनाया जाता है। पुराणों में ऐसा बताया जाता है कि वटवृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का निवास होता है। इसके मूल में भगवान ब्रह्मा, मध्य में विष्णु तथा अग्रभाग में महादेव का वास होता है। इसलिए भी इसका महत्व बढ़ जाता है।

महत्व
हिन्दू धर्म में पूर्णिमा का खास महत्व है। खासतौर से ज्येष्ठ माह में आने वाली पूर्णिमा को विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन किया गया गंगा स्नान और दान बड़ा पुण्य देता है। इसका बहुत अधिक महत्व है। प्रचलित मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान कर जरूरतमंद को दान करने से सारी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। स्कंद पुराण में ज्येष्ठ पूर्णिमा को ही वट सावित्री के रूप में बताया गया है। ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ही अमरनाथ की यात्रा के लिये गंगाजल लेकर भक्त अपना सफर शुरू करते हैं।

मुहूर्त:

ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि (अधिक मास) – 29 मई 2018
पूर्णिमा तिथि आरंभ – 18:41 बजे से (28 मई 2018)
पूर्णिमा तिथि समाप्त – 19:49 बजे तक (29 मई 2018)

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