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आखिर क्यों भीष्म ने बताया कि रति क्रिया के समय स्त्री पुरुष में किसे अधिक आनंद आता है?

महाभारत के युद्ध में जब भीष्म तीरों की सय्या पर लेटे हुए थे । तो हर शाम युद्ध के उपरांत दोनों ही पक्ष के योद्धा उनसे ज्ञान प्राप्त करने के लिए आते थे। इसी क्रम में एक दिन युधिष्ठिर भीष्म पितामह के निकट आये और भीष्म से प्रश्न किया हे पितामह मुझे ये बताये की रतिक्रिया के समय स्त्री पुरुष में किसे आनंद आता है।

तब पितामह ने कथा के माध्यम से युधिष्ठिर को बताया कि एक समय राजा भंग हुआ करते थे ।जो कि बहुत अच्छे दिल के और न्याय प्रिय थे । परंतु उनके घर मे कोई बालक नही था इसलिए उन्होंने सिर्फ अग्नि अनुष्ठान किया । इससे इन्द्र देव क्रोधित हो गए और उसे स्त्री बना दिया। इससे दुखी होकर राजा अपने 100 पुत्रों को राज्य सौपकर जंगल की ओर चला गया। जंगल मे उसे एक ऋषि से मिला जिनसे उसने विवाह कर लिया और कई पुत्रों को जन्म दिया। तब राजा रूप स्त्री उन पुत्रों को राज्य लेकर गया और सभी से साथ मे मिलकर शासन करने को कहा। परंतु इन्द्र ने अपनी माया से सभी पुत्रों को आपस मे ही लड़ा दिया। और सभी आपस मे लड़कर एक दूसरे की हत्या कर दी।

यह देखकर राजा रूप स्त्री विलाप करने लगी तभी वहां इन्द्र प्रकट हुए और उन्हें उनके द्वारा यज्ञ में कई गयी गलती बतायी। तब भंग रूप स्त्री ने इन्द्र देव क्षमा मांगे हुए उनके पैरों पर गिर गयी। तब इंद्रदेव को दया आ गयी और इंद्र देव ने पूछा कि आप अपने किस रूप के पुत्रों को जीवित करना चाहिए। तब स्त्री रुपी भंग ने कहा मैं अपने स्त्री रूप के बाद को जीवित करना चाहती हूँ क्योंकि एक स्त्री का प्रेम पुरुष के प्रेम से कई गुना अधिक होता है।

प्रसन्न होकर इंद्रदेव ने सभी पुत्रों को जीवित कर दिया। और पूछा अब आप अपने किस रूप रहना चाहते है। तब भंग ने कहा मैं स्त्री रूप में ही रहना चाहती हूँ क्योंकि रति क्रिया के समय स्त्री को पुरुष से कई गुना ज्यादा आनंद, तृप्ति और सुख की प्राप्ति होती है इसलिए मैं इस रूप में ही रहना चाहती हूं। इस प्रकार से युधिष्ठिर को अपने प्रश्न का उत्तर मिल गया। अगर आपको हमारी ये पोस्ट पसंद आयी हो तो शेयर और फॉलो करना न भूले।

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