अल्लाह की रहमत पाने के लिए मुसलमान रोज़ा रखते हैं …….

रमज़ान के महीने में सभी साथ में भोजन करते हैं और इस समय अल्लाह का नाम लेकर भोजन किया जाता है इस वजह से सभी में प्यार बढ़ता है और रमज़ान के महीने में आपसी प्यार बढ़ने के लिए अल्लाह का रहम बरसता है

रमज़ान का महीना है और यह महीना हर मुसलमान के लिए ख़ास हैं इस महीने में अल्लाह की रहमत पाने के लिए मुसलमान रोज़ा रखते हैं वह पुरे दिन ना कुछ खाते हैं और ना ही कुछ पीते हैं. रमज़ान के दिनों में केवल दो वक्त होते है जब मुसलमान कुछ खा और पी सकते हैं पहला वक्त होता है सहरी और दूसरा इफ्तारी. इन दोनों वक्त में वह कुछ खाते और पीते हैं और बाकी पुरे दिन वह भूखे-प्यासे रहते हैं. अब सवाल ये आता है कि आखिर क्यों रखते हैं मुसलमान रोज़ा, आइए हम आपको बताते हैं वो बातें जिनके लिए मुसलमान रोज़ा रखते हैं.

 

रोज़ा रखने का पहला उदेश्य यह होता है कि अल्लाह की रहमत मिल जाए और उनपर हमेशा ही अल्लाह मेहरबान रहे. मुसलमान रोज़ा इस कारण से रखते हैं कि उनपर खुदा की रहमत बनी रहे.

रमज़ान के महीने में रोज़ा रखने का मतलब होता है कि मुसलमानो को संयम और अनुशासन सीखने को मिले. यह महीना मुसलमानों को कई चीज़ों का, बातों का ज्ञान करवाता है और इस महीने में वह संयम और अनुशासन सीखते हैं.

 

रमज़ान के महीने में नशीली चींजों से दूर रहना अल्लाह सिखाते हैं और अगर कोई किसी तरह का नशा करता है तो उसे रोज़े रखने का हक़ नहीं होता क्योंकि उसका रोज़ा टूट जाता है. व्यक्ति को अल्लाह के करीब जाने के लिए रोज़ा रखवाया जाता है और इसी वजह से इस समय कोई नाश ना करने की सलाह दी जाती हैं और अच्छी आदतों को ग्रहण करने को कहा जाता है.

 

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