रमज़ान महीनें में करे गरीबों की मदद खुदा होगा मेहरबान ……

रमजान के महीने में नमाज़ और रोज़ो के साथ कमाई का एक हिस्सा सदके(दान) के रूप में देने को भी कहा गया हैं. रमजान में रोज़ा रखने के साथ ही कई नियमों का पालन करना भी महत्वपूर्ण होता हैं. रोज़दार को रोज़ा रखने के साथ ही नमाज़, दुआ,सदके और ज़मात देना बहुत जरूरी होता हैं.

शरीयत के मुताबिक जकात एक प्रकार का दान होता हैं जो कि आपकी कमाई का हिस्सा होने के साथ ही अल्लाह के अन्य बन्दों की मदद करने और खुशियां बांटने के लिए दी जाती हैं.

 

कुरान-ए-पाक में जकात के लेन-देन के वक़्त,लेन-देन का मुकम्मल तरीका,कितना दिया जाए और इसको इस्तेमाल करने के भी अलग कायदे दिए गए हैं, इसलिए इस्लाम में जकात को बुनियादी फर्जों में से एक माना जाता है.

 

कुरान के अनुसार, यदि परिवार में सगा भाई, बहन, चाचा, ताऊ, खालू, मामा, भांजा, भांजी आदि कोई भी गरीब हैं तो उन्हें जकात दी जा सकती हैं. जकात से होने वाली आमद से मुफलिसों और बेसहारा वेबा औरतों की मदद भी कर सकते है

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