बकरवाल समुदाय की 8 वर्ष की लडक़ी से बलात्कार के बाद बेरहमी से हत्या….

आरोपियों में हैवानियत इस कदर सवार थी कि, उनमे से एक बलात्कारी को ख़ास तौर पर मेरठ से बुलाया गया था, सिर्फ उसकी ”वासना को संतुष्ट” करने के लिए। मासूम को सर पर पत्थर से दो बार मारा गया,ये तसल्ली करने के लिए की उसकी मौत हुई है या नहीं।

बकरवाल समुदाय की 8 वर्ष की एक लडक़ी से बलात्कार करके उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गयी। जम्मू कश्मीर पुलिस अपराध शाखा की डीएनए परीक्षण, फोरेंसिक रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर रसाना गाँव में हत्या से पहले उस लड़की को कई दिन तक लिए बंदी

वासना किस तरह से उन जानवरों पर सवार थी इस बात का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि मासूम को जान से मारने के पहले एक पुलिस वाले ने बाकियों से रुकने को कहा, क्योंकि वो ‘एक आखिरी बार फिर से उसका रेप करना चाहता था’।

 

और ये सब किया गया रसाना गांव से एक घूमंतू  मुस्लिम परिवार को हटाने के लिए. नफरत के नाम पर बलि चढाई गयी एक 8 साल की मासूम जिसे शायद हिन्दू -मुस्लिम के मायने भी नहीं पता होंगे.

एफआईआर नंबर 131/2018 दर्ज करते हुए कठुआ पुलिस ने किसी भी वकील का नाम नहीं सामने लाया है। बल्कि कहा गया है कि इस मामले में 30 से 40 वकीलों के खिलाफ शिकायत दर्ज की जाती है जो केस में क्राइम ब्रांच की तरफ से चार्जशीट पेश करने में बाधा खड़ी करने की कोशिशें कर रहे थे।

जम्मू कश्मीर के पुलिस महानिदेशक एस.पी. वैद्य ने आईएएनएस से फोन पर बताया- “यह एफआईआर कुछ वकीलों के खिलाफ दर्ज की गई है जो कठुआ के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में क्राइम ब्रांच की तरफ से चार्जशीट पेश करने में बाधा खड़ी करने की कोशिशें कर रहे थे। इस घटना में जो भी शामिल थे उनके खिलाफ कानून के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।

 

वकीलों के प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की दखल के बाद आखिरकार सात अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट फाइल कर दी गई है। गौरतलब है कि जनवरी में कठुआ के हीरानगर तहसील के रसाना गांव में एक आठ साल की बच्ची का अपहरण कर उसके साथ रेप और उसके बाद हत्या की गई थी।

चार्जशीट फाइल करने के खिलाफ वकीलों की तरफ से बाधा खड़ी करने की कोशिशों की आलोचना करनेवाले जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एफआईआर दर्ज करने का स्वागत किया है। इस पूरे मामले में सीबीआई जांच की मांग की जा रही है। ऐसे में वकीलों ने इस डिमांड के विरोध में काफी हंगामा किया था।

 

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