आलू की कीमतों में तेजी की वजह कम सप्लाई……

 

दरअसल, आलू की कीमतों में तेजी की वजह कम सप्लाई को माना जा रहा है। इसके अलावा आलू के उत्पादन में भी इस साल गिरावट आई है। हालांकि, एक्सपर्ट्स मानते है कि इससे किसानों को ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद कम ही नजर आती है।

5-10 रुपए किलो बिकने वाला आलू अचान 25 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है। इस बीच महंगाई बढ़ने की आशंका के चलते सरकार भी एक्शन में आ गई है।

इसके अलावा पिछले दो साल से आलू का भाव सस्ता रहने से किसानों ने आलू का बुआई रकबा 5-7 फीसदी घटाया है। इस वजह से आलू के उत्पादन में 10-20 फीसदी की गिरावट आई है। इसके साथ ही फसल की गुणवत्ता भी कम हो गई है, क्योंकि किसानों ने पिछले साल बीज के लिए पुराने आलू का ही इस्तेमाल किया था।

आलू के बढते दामों पर सरकार की नजर : खुदरा बाजार में आलू की कीमत 25 रुपये पर पहुंच गई है। ऐसे में आलू ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। कीमतें चढ़ने के कारण सरकार को आलू जमाखोरी की आशंका भी सता रही है, इसलिए अब स्टॉक लिमिट लगाने की तैयारी की जा रही है। सरकार ने इसके लिए एक कमेटी का गठन कर दिया है।

क्यों बढ़े दाम: इस साल उत्तर प्रदेश में आलू का उत्पादन 20 फीसदी घट गया है। जिसके चलते आलू की कीमतों में तेजी आई है। पिछले साल, किसानों को आलू का भाव 4-5 रुपये प्रति किलोग्राम मिल रहा था। अब उन्हें आलू का भाव 13-15 रुपये प्रति किलो तक मिल रहा है। बता दें कि उत्तर प्रदेश, देश में आलू का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। उत्तर प्रदेश में पिछले साल 1.6 करोड़ टन आलू का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ था।

अभी और बढ़ सकती है कीमतें : उत्तर प्रदेश के अलावा गुजरात में भी इस साल आलू का उत्पादन काफी कम हुआ है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, गुजरात में पिछले साल की 5.4 करोड़ बोरी की तुलना में 3.4 करोड़ बोरी (50 किग्रा का प्रत्येक बैग) का उत्पादन रहने की संभावना है। उपभोक्ताओं को पिछले साल की दर से लगभग दोगुना 18-20 रुपये प्रति किलो का भुगतान करना पड़ रहा है। आगे भी कीमतों में तेजी की संभावना है। आपको बता दें कि तूफान की वजह से पंजाब और यूपी में आलू की फसल भी खराब हुई है। दोनों राज्यो में आलू की 15-20 फीसदी फसल खराब हो गई है।

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