मां गंगा के लिए ऐश की जिंदगी छोड़कर बने भिक्षु….

बता दें कि राधेकृष्ण दूबे गोरखपुर जिले के रहने वाले हैं। और उन्होंने 24 अप्रैल से बलिया के सिताब दियारा से चल कर गंगा किनारे के गांवों में हरियाली बढ़ाने के लिए ‘गंगा हरीतिमा संकल्प भिक्षाटन यात्रा’ शुरू कर दी है। इसके लिए वो भिक्षा में रुपये-पैसे के बजाए हल्दी और चावल लेकर एक पौधा लगाने का संकल्प दिला रहे हैं।

वन महकमे के इस रिटायर अफसर ने अपने अनोखे भिक्षाटन के बारे में बताते हुए कहा- कि जब वह बलिया में थे, तभी उन्होंने गंगा की सफाई और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कुछ करने का संकल्प लिया। उसी दिन से गंगा के तट के गांव में घूम-घूमकर ग्रामीणों से भिक्षाटन के रूप में हल्दी और चावल लेकर एक पौधा लगाने के संकल्प की भीख मांग रहे हैं।

राधेकृष्ण ने कहा, इस काम से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। उन्होंने कहा,कि मैं ग्रामीणों को बताता हूं कि नदी के किनारे पौधे लगाने और प्रदूषित न करने से गंगा स्वच्छ रहेगी। यह नदी हमारी अनमोल धरोहर हैं, इसे हमें ही बचाना होगा। वन विभाग के इस रिटायर अफसर का कहना है कि जहां तक बने अपने पेंशन के पैसों से पौधे खरीदकर ग्रामीणों को देते हैं और इसे लगाने की भीख मांगते हैं। अगर कोई मदद कर देता है, तो उसे सहयोग मानकर ले लेते हैं।

राधेकृष्ण ने बताया, ‘बस और ट्रेन से सफर करने के लिए खुद का पैसा खर्च करता हूं। मैं निस्वार्थ भाव से यह सेवा कर रहा हूं क्योंकि गंगा मैया पूर्वजों की धरोहर हैं और इसे बचाना हर नागरिक का धर्म है। गंगा किनारे के 90 गांवों की यात्रा करने के साथ सैकड़ों लोगों को संकल्प यह दिला चुके हैं।

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