आखिर 20 साल तक किसने दिया सलमान का साथ जो नहीं गए जेल

आम आदमी तो तारीख पर तारीख लेकर मर जाता है और उनके पोते-पोती फैसला सुनते हैं. इस देश में जजों की भयंकर कमी है, जिस चलते मुकदमे वर्षों लटके रहते हैं.

नदीम एस अख्तर 
सलमान खान का मामला देख रहा हूं. उनको सजा के बाद जितनी तेजी से दो लोगों को जमानत के लिए कोर्ट बुलाया गया और जिस वेग से तुरत-फुरत सलमान को जमानत दिलवाने की कोशिश हुई है, वो देश को समझना होगा. पता ये चल रहा है कि सलमान को दो साल की सजा हुई है और अब लगता है कि हाथोंहाथ जमानत भी मिल जाएगी यानी जेल नहीं जाना होगा उनको.

फर्ज कीजिए सलमान की जगह अगर कोई आम आदमी होता तो क्या ये सब इतनी आसानी से हो जाता ?

दूसरी बात. जिस तरह मैं पब्लिक में सलमान खान और मामले से जुड़े दूसरे फिल्मी सितारों के लिए सिम्पैथी देख रहा हूं, वो समझ से परे है. ये लोग बच्चे नहीं थे, जब शिकार करने गए थे. मतलब अपने शौक के लिए बेजुबान जानवरों को मारने गए थे. ये हंसी-मजाक नहीं है. जब आप स्टार होते हैं तो आप पर बड़ी जिम्मेदारी होती है क्योंकि आपके हेयर स्टाइल से लेकर हर डायलॉग तक को पब्लिक फॉलो करती है. फिर भी सब मिलकर शिकार करने गए थे, मौज लेने के लिए. गंभीर बात है.

सो सलमान खान से सिम्पैथी ना दिखाइए. हां, उनकी जगह अगर राजा भैया
(डीएसपी की मौत का मामला याद कीजिए) या उनके जैसा कोई भी दूसरा राजनेता होता तो अब तक उनके भक्त समर्थन में क्या-क्या नहीं बोल रहे होते. कुल मिलाकर इस देश में कानून दो तरह से काम करता है. अमीरों और सक्षम लोगों के लिए अलग तरह से और गरीबों के लिए बिल्कुल अलग तरह से.

फिर देखिए सलमान जैसे स्टार के मामले में भी सजा तक पहुंचने में करीब दो दशक लग गए. आम आदमी तो तारीख पर तारीख लेकर मर जाता है और उनके पोते-पोती फैसला सुनते हैं. इस देश में जजों की भयंकर कमी है, जिस चलते मुकदमे वर्षों लटके रहते हैं.

लोकतंत्र को अगर जिंदा रखना है तो न्यायपालिका को मजबूत करना होगा. न्यायिक सुधार बहुत जरूरी है लेकिन इसमें ना राजनेताओं की रुचि है और ना जनता की. कभी देखा आपने कि जजों की तादाद बढ़ाने या कोर्ट में केसेज जल्दी खत्म हो, इस खातिर नेता ने वोट मांगे हों और जनता ने ईवीएम का बटना दबाया हो !!

नहीं ना !! आप जाति-धर्म-विचारधारा पर अटके रहिए. देश चल ही रहा है. आगे भी चलता रहेगा.

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