बिहार से रोजाना दो हजार ट्रक बालू जा रहा उत्तरप्रदेश, सरकार को हो रहा खूब फायदा

 

इस समय बिहार में 29 जिलों में बालू का खनन किया जाता है। इन्हें 25 बालूघाट यूनिट के रूप में चिह्नित किया गया है। इन जिलों में 156 बालू घाटों की बंदोबस्ती की गई है। यही नहीं विभिन्न सरकारी कार्य विभागों को भी 12 बालू खनन पट्टे दिए गए हैं। इसके अलावा कई अन्य जिलों में बालूघाटों की बंदोबस्ती की जा रही है। कार्य विभागों को अग्रिम राशि लेकर बालू भी दिए गए हैं

बिहार स्टेट माइनिंग काॅरपोरेशन (बीएसएमसी) द्वारा रोजाना 4000 ट्रक, जबकि बंदोबस्त धारियों द्वारा संयुक्त रूप से 8000 ट्रक बालू रोजाना बाजार तक पहुंच रहा है। इनमें से दो हजार ट्रक बालू सीधे यूपी जाता है। बताया जाता है कि यूपी जाने वाले ट्रकों की संख्या इससे अधिक है। इनकी संख्या विभाग के आंकड़े से बहुत अधिक है। कुछ अधिकारियों के अनुसार अवैध खनन का बड़ा हिस्सा भी यूपी जा रहा है।
विभाग यूपी जाने वाले बालू से दोगुना टैक्स वसूलता है। टैक्स की राशि राज्य के मौजूदा प्रीमियम से दोगुना है। विभाग इसमें बढ़ोतरी की और संभावना देख रहा है। इसीलिए चालानों के ई-आक्शन की योजना बनाई जा रही है। इससे प्रीमियम की राशि कम से कम डेढ़ गुनी हो जाएगी। यह राशि इस समय दो करोड़ रुपए रोजाना है। ई-आक्शन के बाद यह राशि कम से कम तीन करोड़ रुपए रोजाना हो जाएगी।

बालू के यूपी भेजे जाने से सरकार के राजस्व में तो बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन बिहार में बालू की किल्लत बनी हुई है। यही नहीं बालू की दरों में भी कमी नहीं हो पा रही है। हालांकि, विभाग इससे इंकार करता है। उसका मानना है कि बालू की किल्लत नहीं है और इसकी कालाबाजारी नहीं हो रही है।
।बिहार से रोजाना दो हजार ट्रक बालू उत्तर प्रदेश चला जा रहा है। खान एवं भूतत्व विभाग के आंकड़े बताते हैं कि ये बालू घाटों से यूपी के विभिन्न शहरों को भेजे जा रहे हैं। बिहार से सटे यूपी के शहरों का कंस्ट्रक्शन उद्योग काफी हद तक बिहार के बालू पर निर्भर हो गया है। विभाग भी मानता है कि बिहार के ज्यादातर बालू की खपत यूपी में हो रही है।

 

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