बुरा समय आने से पहले हर इंसान को देता है 10 तरह के संकेत…लोग पहचान ही नहीं पाते

अभी श्राद्ध पक्ष चल रहा है और इन दिनों में पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान आदि श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। ज्योतिष में पितरों से संबंधित एक दोष बताया गया है, जिसे पितृ दोष कहा जाता है। पितृ दोष के संबंध में मान्यता है कि परिवार में किसी की अकाल मृत्यु हो जाती है और मृत व्यक्ति का सही विधि से श्राद्ध नहीं हो पाता है तो उस घर में जन्म लेने वाली संतान की कुंडली में पितृ दोष रहता है। खासकर पुत्र संतान की कुंडली में ये दोष रहता है। इसकी वजह से उन्हें अपने जीवन में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य पर राहु की दृष्टि पड़ रही है या कुंडली के किसी भी भाव सूर्य और राहु की युति है तो पितृ दोष बनता है। इस दोष से सूर्य के सकारात्मक फल बहुत कम मिल पाते हैं। कुंडली में जब राहु-सूर्य साथ हो या राहु पंचम भाव में हो या सूर्य-राहु के नक्षत्र में हो तो पितृ दोष बनता है।

पितृ दोष के संकेत :  1. जिस व्यक्ति के जन्म कुंडली में पितृ दोष होता है, उसे संतान सुख आसानी से प्राप्त नहीं हो पाता है। पति-पत्नी स्वस्थ होते हैं, तब भी उन्हें संतान प्राप्ति में परेशानियां आती हैं। 2. यदि किसी व्यक्ति के घर में उत्तर-पूर्व में या पश्चिम-दक्षिण में शौचालय है तो यह भी पितृ दोष का संकेत है। 3. कुछ लोगों की कुंडली में पितृ दोष इतना अधिक प्रभावी रहता है कि व्यक्ति को जमीन-जायदाद एवं संपत्ति से बहुत ज्यादा हानि हो सकती है।

4. पितृ दोष के कारण धन होने पर भी घर में सुख-शांति नहीं रहती है। 5. घर में पितृ का स्थान दक्षिण और पश्चिम का कोना माना गया है यानी नैऋत्य कोण। कुंडली में जब भी पितृ दोष बनता है तो राहु मजबूत हो जाता है और जिसकी कुंडली में नकारात्मक उर्जा मजबूत होती है, उसके घर में भी इसका असर दिखता है। 6. घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह ईशान कौन से होता है और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह नैऋत्य कोण से होता है, जब कुंडली में पितृ दोष होता है यानी राहु मजबूत होता है तो व्यक्ति जिस घर में रहता है, उस घर के नैऋत्य कोण में वास्तु दोष होता है।

7. नैऋत्य कोण में शौचालय होना, गंदगी होना, नाली होना, दक्षिण-पश्चिम दिशा में गंदगी होती है तो राहु की नकारात्मकता बढ़ती है। ये भी पितृ दोष का संकेत है। 8. दक्षिण-पश्चिम दिशा में पृथ्वी की ऊर्जा होती है, यदि घर की इस दिशा में पेड़-पौधे हों या दीवार का रंग हरा हो तो भी पृथ्वी की ऊर्जा समाप्त हो जाती है, जिससे भी यहां वास्तु दोष उत्पन्न होता है। ये भी पितृ दोष का ही एक संकेत है।

9. घर में नैत्रत्य कोण रिश्ते का स्थान भी है और अगर यहां पर वास्तु दोष होता है तो वैवाहिक जीवन में बहुत सारी परेशानियां आती हैं। 10. पितृ दोष की वजह से पति-पत्नी के बीच बार-बार झगड़े होते हैं और अशांति बनी रहती है।

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