अवैध निर्माणों की सीलिंग के काम में बाधा डालने वालों को सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि दिल्ली में अनधिकृत और अवैध निर्माण की सीलिंग करने के सरकारी अधिकारियों के काम में बाधा डालने वालों को अदालत से सीधे तिहाड़ जेल भेज दिया जाएगा। न्यामयूर्ति मदन बी. लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की खंडपीठ ने इस चेतावनी के साथ ही नजफगढ़ जोन की वार्ड समिति के अध्यक्ष मुकेश सूर्या की बिना शर्त माफी स्वीकार कर ली। मुकेश पर अधिकारियों को धमकी देने के आरोप थे।

शीर्ष अदालत में फोरम ऑफ एमसीडी इंजिनियर्स ने आरोप लगाया था कि सूर्या ने अधिकारियों को उस वक्त धमकियां दीं, जब वे न्यायालय द्वारा नियुक्त निगरानी समिति के निर्देशानुसार अवैध निर्माण सील करने गए थे। इस मामले में संक्षिप्त सुनवाई के दौरान सूर्या के वकील ने पीठ को सूचित किया कि उनके मुवक्किल ने अपने कृत्य के लिए बिना शर्त माफी मांगते हुए एक हलफनामा दाखिल किया है और वह भविष्य में ऐसा नहीं करेंगे। पीठ ने कहा, ‘यह सुनिश्चित कीजिए कि इसकी पुनरावृत्ति नहीं हो और यदि आपने दोबारा किया, फिर सूटकेस के साथ ही अदालत आएं क्योंकि आपको यहीं से सीधे जेल भेज दिया जाएगा।’

शीर्ष अदालत ने इससे पहले अनधिकृत निर्माण की सीलिंग करने वाले सरकारी अधिकारियों को धमकियां देने वालों को चेतावनी दी थी और कहा था कि इस तरह की ‘दादागीरी’ नहीं चलेगी। इस मामले में न्याय मित्र की भूमिका निभा रहे एक वकील ने पीठ से कहा कि फोरम ऑफ एमसीडी इंजिनियर्स का कहना है कि उन्हें ऐसे क्षेत्रों में ग्रिड अधिकारी नियुक्त किया गया है जो नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। वे चाहते हैं कि उन्हें ऐसे इलाकों के लिए जिम्मेदारी नहीं दी जाए।

फोरम के वकील ने कहा कि उन्होंने इस बारे में एक अर्जी भी दायर की है। पीठ ने कहा कि इस मामले में 14 अगस्त को विचार किया जाएगा। शीर्ष अदालत ने पिछले महीने निर्देश दिया था कि दिल्ली में अवैध निर्माणों की सीलिंग या उन्हें गिराने का काम नहीं रोका जाएगा। इससे पहले केन्द्र ने कहा था कि उसने किसी भी स्थानीय निकाय को सीलिंग अभियान धीमा करने के लिए कोई निर्देश नहीं दिया है। न्यायालय राजधानी में अनधिकृत और अवैध निर्माणों से उत्पन्न समस्या से संबंधित मुद्दों पर विचार कर रहा था।

Facebook Comments